विभिन्न स्नानों का नाम पढ़ कर थोड़ी सी हैरानी हो सकती है कि नहाना तो नहाना होता है। इसमें विभिन्नता कैसी। आम जनता नहाने का अर्थ मात्रा शरीर की सफाई समझती है और उनके लिए स्नान तो तालाब, कुएं, नदी, नल और शॉवर के नीचे ही होता है।
वैसे तो प्रायः सब लोग प्रतिदिन स्नान करते हैं परन्तु कुछ ऐसे स्नान भी हैं जो अधिक स्फूर्ति प्रदान करते हैं और स्वास्थ्य लाभ देते हैं। आइये जानें कुछ ऐसे स्नान जो हमें कई रोगों से दूर रखते हैं।
कटि स्नान:-
पेट की बीमारियों में कटि स्नान बहुत उपयोगी होता है। अधिकतर बीमारियां पेट से ही होती हैं। यदि प्रारम्भ से ही इन्हें रोक दिया जाये तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। कटि स्नान हेतु एक बड़े टब में पानी भरा जाता है। पानी इतना होना चाहिए जिसमें नितम्ब डूब सकें और नाभि से ऊपर पेट तक पानी रह सके। टब ऐसा हो जिसमें आराम से बैठा जा सके।
टब का पानी मौसम के अनुसार ताजा या हल्का गुनगुना रखें। प्रारम्भ में इसमें 5-10 मिनट तक बैठना चाहिए। धीरे-धीरे इसे आधे घंटे तक बढ़ा सकते हैं। खुरदरे तौलिये को गोल लपेट कर नाभि के नीचे दाएं से बाएं रगड़ें, फिर बाएं से दाएं ताकि पेट में जो खाना जमा पड़ा है, वह धीरे-धीरे ढीला होकर बाकी खाने के साथ मिल कर मल द्वारा बाहर निकल जाये और पेट स्वच्छ और निर्मल हो जाये। ध्यान रखें बस शरीर के वही भाग भीगें जो टब के अन्दर हों। बाकी शरीर गीला न हो नहीं तो कटि स्नान का महत्त्व खत्म हो जायेगा।
यदि कोई रोगी इस स्नान का लाभ उठा रहा हो तो स्नान के बाद रोगी को लिटा कर उसके शरीर को गर्म करने हेतु कम्बल या मोटी चादर ओढ़ा दें। सामान्य व्यक्ति को स्नान के बाद कुछ व्यायाम या तेजी से टहलना चाहिए ताकि शरीर में गर्मी बनी रह सके।
इस स्नान से मोटापा कम होता है, कब्ज दूर होती है, पेट के कई विकारों को दूर करता है, अजीर्ण में लाभ होता है। इससे पाचन संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ती है और आंतों की गंदगी साफ होती है।
पाद स्नान:-
पाद स्नान पैरों व पिंडलियों के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस स्नान हेतु एक बाल्टी में सहन करने योग्य गर्म पानी डालें और एक बाल्टी में सामान्य ताप वाला पानी। गर्म पानी वाली बाल्टी में थोड़ा नमक, नींबू का रस मिला लें। अब इस बाल्टी में अपने पैर पिंडलियों तक भिगो दें और शरीर पर तौलिया लपेट कर किसी कुर्सी पर बैठ जायें। जब पानी का तापमान सामान्य होने लगे तो पांव सामान्य पानी में डाल दें। इस प्रकार से गर्म पानी में कुल 20-30 मिनट तक पाद स्नान करें।
इस स्नान से पैरों की ऐंठन, पिंडलियों का दर्द, खांसी, पुराना जुकाम, सिर का भारीपन, सिर दर्द में लाभ मिलता है।
मेहन स्नान:-
यह स्नान विशेषकर महिलाओं के लिए अधिक लाभप्रद होता है पर इस स्नान का लाभ पुरुषों को भी मिलता है। इस स्नान में अपने गुप्तांगों को पानी में रखकर उसे पानी से धोते हैं।
आधा टब पानी से भर लें। इसमें एक ऊंचा लकड़ी का पाट रख लें जिसकी सतह सूखी हो, टब में बैठकर अपने पांव बाहर की ओर रखे जैसा कटि स्नान में रखे जाते हैं। अब अपने प्राइवेट पार्ट पर नर्म साफ कपड़े को पानी में डुबोकर उस पर पानी डालें। धीरे-धीरे कपड़े से अपने जननेन्द्रिय या लिंग के बाहरी भाग को साफ करें। ध्यान रखें कपड़े से उन अंगों को रगड़े नहीं। इस स्नान से स्त्रियों की मासिक धर्म की समस्याएं, प्रदर रोग, पेट की कई बीमारियां दूर होती हैं।
भाप स्नान (स्टीम बाथ):-
भाप स्नान घर पर भी लिया जा सकता है। इसके लिए लकड़ी की बड़ी पेटी होनी चाहिए। आजकल बडे़ शहरों में भाप स्नान जिम, ब्यूटीपार्लर आदि में लिया जाता है क्योंकि वहां आप निश्चिंत रूप से बैठकर इस स्नान का आनंद उठा सकते हैं। वहां पर भाप स्नान हेतु अलग से एक छोटा रूम होता है और बैठने के लिए भी उचित स्थान होता है। कमरे में भाप पाइप द्वारा फैल जाती है जिससे शरीर को इसका पूरा लाभ प्राप्त हो सकता है। भाप स्नान लेते समय वस्त्रों को नहीं पहनना चाहिए। अधिक से अधिक अन्डरवीयर पहन सकते हैं।
अधिक दुर्बल या रोगी को भाप स्नान नहीं देना चाहिए। भाप स्नान लेने के तुरन्त बाद ताजे पानी से नहाना चाहिए।
इस स्नान से गठिया रोग में लाभ मिलता है, मोटापा कम होता है, रक्त संबंधी रोग दूर होते हैं। भाप स्नान से शरीर के सारे रोम छिद्र खुलकर स्वच्छ होते हैं। जिन लोगों को खुजली, दाद आदि की शिकायत हो, उन्हें यह स्नान नहीं लेना चाहिए।
इस प्रकार विभिन्न स्नानों से शरीर को कई लाभ प्राप्त होते हैं जिन्हें समय-समय पर लिया जा सकता है।
