अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीदें बढ़ी; होर्मुज की नाकेबंदी प्रभावी

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काहिरा, 15 अप्रैल (एपी) संघर्षरत अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीदें उस समय बढ़ गईं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ‘आने वाले एक दो दिन में’ पश्चिम एशिया में शांति के लिए दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है।

इस बीच, अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की उसकी नाकाबंदी पूरी तरह से प्रभावी है। ईरान ने भी इलाके में मौजूद लक्ष्यों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी है।

ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वार्ता का दूसरा दौर ‘‘अगले दो दिनों में’’शुरू हो सकता है। उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि कूटनीतिक रास्तों से बातचीत बहाल करने के लिए काम हो रहा है और यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है।

क्षेत्रीय अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और ईरान और दो सप्ताह युद्धविराम बढ़ाने को लेकर ‘सैद्धांतिक रूप से सहमत’ हो गए है, जो 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, ताकि कूटनीति समाधान के लिए और समय मिल सके।

मध्यस्थता प्रयासों में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि मध्यस्थ तीन मुख्य विवादित बिंदुओं – ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान को युद्ध के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे – पर समझौता करने के लिए काम कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार के साथ हुई अपनी बैठक का हवाला देते हुए कहा कि वार्ता फिर से शुरू होने की ‘प्रबल संभावना’ है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कार्यालय ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बुधवार को सऊदी अरब की यात्रा पर जाएंगे, क्योंकि उनका देश नई वार्ता में मध्यस्थता करने के लिए प्रयासरत है, और इसके बाद वह शुक्रवार को तुर्किये में शुरू हो रहे अनातलिया शांति मंच में शिरकत करेंगे।

युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों की वजह से तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जबकि अमेरिका के शेयर बाजार में उछाल आया है और अब यह जनवरी में बने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए हैं।

इस बीच, अमेरिक के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वाशिंगटन में दशकों बाद इजराइल और लेबनान के राजदूतों के बीच हुई पहली सीधी वार्ता मंगलवार को सकारत्मक तरीके से संपन्न हुई।

इजराइली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि दोनों देश चरमपंथी हिजबुल्ला से लेबनान को मुक्त कराने के मामले में एकमत हैं।

लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने बैठक को ‘रचनात्मक’ बताया, लेकिन उन्होंने इजराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथियों के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने की अपील की। मार्च से चल रहे इस युद्ध के कारण लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

इजराइल और लेबनान तकनीकी रूप से 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद से ही युद्ध की स्थिति में हैं। इजरायल के साथ राजनयिक संबंधों को लेकर लेबनान में अब भी एक राय नहीं है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान में आयोजित शांति वार्ता बेनतीजा रही। व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं गतिरोध के केंद्र में हैं।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बातचीत में कहा, ‘‘हमारा नेतृत्व अमेरिका और ईरान को संघर्ष समाप्त करने में मदद करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।’’

युद्धविराम की मियाद हालांकि बढ़ती नजर आ रही है। इसके बावजूद रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर टकराव से संघर्ष की आशंका बरकरार है।

अमेरिकी सेना की मध्य कमान ने मंगलवार को कहा कि पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज नाकेबंदी को पार नहीं कर पाया, जबकि छह व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी सेना के निर्देश का पालन करते हुए वापस मुड़कर ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश किया।

इस नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना है, जिसने 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से लाखों बैरल तेल का निर्यात किया है, जिसमें से अधिकांश एशिया को निर्यात किया गया है।

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