संयुक्त राष्ट्र, 15 अप्रैल (भाषा) संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें उनकी विरासत और संवैधानिक नैतिकता को विकसित करने के उनके प्रबल प्रयासों का उल्लेख किया गया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को आयोजित इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक विखंडन और निरंतर संघर्षों से भरे इस अशांत समय में आंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता को बढ़ावा देने का आह्वान विशेष रूप से प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि इससे बहुपक्षवाद को मजबूत करने, संयुक्त राष्ट्र में प्रभावी सुधार लाने, इसके प्रमुख अंगों को पुनर्जीवित करने और संगठन को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।
यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘डॉ. बी. आर. आंबेडकर की संवैधानिक नैतिकता की परिकल्पना और बहुपक्षवाद के लिए इसकी प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित किया गया था।
भारतीय राजदूत ने भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित करते हुए भारतीय संविधान और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बीच समानताओं की पहचान की।
वरिष्ठ नौकरशाह और आंबेडकर शोधार्थी डॉ. राजा शेखर वुंद्रू ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि दो विश्व युद्धों और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के साक्षी रहने के कारण आंबेडकर ने बहुपक्षवाद के महत्व को समझा था।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि आंबेडकर भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति थे।