बादाम पोषक तत्वों का संघनित स्रोत तो है मगर साथ ही साथ बादाम में कुछ अवगुण भी हैं। इसीलिए बादाम को हमेशा भिगोकर छिलका उतारने के बाद ही खाने की सलाह दी जाती है। बादाम में एक विशेष प्रकार का घातक रसायन पाया जाता है जिसे अम्यग्डलिन कहते है। यही अम्यग्डलिन साइनाइड को जन्म देता है और साइनाइड को तो आप जानते ही हैं…साक्षात् मौत। मीठे बादाम में इसकी मात्रा बहुत कम होती है और कड़वे बादाम में बहुत ज्यादा। कड़वे बादाम में एक मीठे बादाम के मुकाबले 42 गुना तक। एक कड़वे बादाम में 4-9 मिलीग्राम तक हाइड्रोजन साइनाइड हो सकता है। साठ किलोग्राम के एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 30-210 मिलीग्राम हाइड्रोजन साइनाइड मारक सिद्ध हो सकता है। कम से कम 4 कड़वे बादाम और अधिक से अधिक 50 कड़वे बादाम किसी की भी जान खतरे में डाल सकते हैं। इसके अलावा मीठे और कड़वे दोनों तरह के बादाम में आक्सलेट भरपूर मात्रा में होते हैं और जो लोग पथरी की समस्या से ग्रसित हैं, उनके लिए बादाम का सेवन सर्वथा वर्जित है। विशेष रूप से वो लोग जिनके अंदर कैल्शियम आक्सलेट वाली पथरी बनती है। छिलके वाला बादाम खाने से पेशाब में जलन हो सकती है और यह इन्हीं घातक रसायनों के कारण होती है। इसलिये कोशिश करें कि बादाम बिना छिलका उतारे न खाया जाए। एक साथ बहुत अधिक मात्रा में भी न खाया जाए। एक दिन में चार बादाम पर्याप्त हैं।