सुजीत ने 65 किग्रा में अपने दबदबे पर कहा, ऐसा नहीं है कि कोई मुझे हरा नहीं सकता
Focus News 20 April 2026 0
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले एक साल में 65 किग्रा भार वर्ग में लगभग अजेय रहे भारतीय पहलवान सुजीत कलकल स्वयं को अपना आदर्श और जीत का प्रबल दावेदार मानते हैं लेकिन इसके साथ ही वह एलीट वर्ग की प्रतियोगिताओं में परिणाम को लेकर अनिश्चितता क प्रति भी जागरुक हैं।
सुजीत ने जून 2025 में अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में मिली जीत के बाद से सीनियर विश्व चैंपियनशिप को छोड़कर प्रत्येक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने हाल में बिश्केक में सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। उनका मानना है कि प्रदर्शन में निरंतरता और आत्मविश्वास उनकी सफलता की कुंजी रहे हैं।
सुजीत ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘मैं किसी खास व्यक्ति का अनुसरण नहीं करता। मुझे अपने मुकाबले देखना पसंद हैं, वह भी विशेषकर रविवार को। आप कह सकते हैं कि मैं खुद को अपना आदर्श मानता हूं।’’
सुजीत भले ही किसी विशेष पहलवान को अपना आदर्श नहीं मानते, लेकिन वह योगेश्वर दत्त, बजरंग पूनिया और अमित धनकड़ जैसे दिग्गज पहलवानों की प्रशंसा करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं योगेश्वर दत्त और अन्य पहलवानों को देखता था। उनसे सहनशक्ति, गति और ताकत जैसी कई चीजें सीखने को मिलती हैं, लेकिन मैं अधिकतर अपने मुकाबलों का विश्लेषण करता हूं। हमारा कार्यक्रम व्यस्त रहता है, लेकिन रविवार या विश्राम के दिनों में मैं अपने और सीनियर पहलवानों के मुकाबले देखता हूं। इससे गलतियों की पहचान करने और उनमें सुधार करने में मदद मिलती है।’’
सुजीत ने 65 किग्रा में अपने दबदबे के बावजूद यह मानने से इनकार कर दिया कि इस वजन वर्ग में उनका पूर्ण नियंत्रण है। उनसे पहले ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया इस भार वर्ग में भाग लेते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है कि कोई मुझे हरा नहीं सकता। हर कोई कड़ी मेहनत करता है। जिसका दिन अच्छा होता है, वही जीतता है। ईश्वर की कृपा से मैं अब तक जीतता आया हूं और आगे भी जीतता रहूंगा तथा अपने देश को गौरवान्वित करूंगा।’’
इस 23 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि आगामी एशियाई खेल में उनके प्रदर्शन की असली परीक्षा होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले दो साल से किसी भारतीय पहलवान से नहीं हारा हूं। ईरान और जापान की बात करें तो एशियाई खेलों में हमें अपना स्तर पता चल जाएगा। अभी भी कुछ कमियां हैं और हम उन पर काम कर रहे हैं।‘‘
अपनी मजबूत रक्षण और तीखे जवाबी हमले करने में माहिर सुजीत ने स्वीकार किया कि अब उनका ध्यान अपने आक्रामक खेल, सहनशक्ति और ताकत में सुधार करने पर है।
उन्होंने कहा, ‘‘रक्षात्मक रणनीति मेरी सबसे बड़ी खूबी है। मुझे आक्रमण पर और अधिक काम करने की जरूरत है। मुझे अपनी सहनशक्ति और ताकत में भी सुधार करने की जरूरत है। हम इन कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
सुजीत ने बताया कि राष्ट्रीय शिविर में भारतीय फ्रीस्टाइल के मुख्य कोच विनोद कुमार जैसे कोच के मार्गदर्शन में अभ्यास करने से उन्हें फायदा हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘कोच हमसे बहुत मेहनत करवाते हैं। इससे सहनशक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है।’’
सुजीत अपने कौशल को निखारने के लिए विभिन्न भार वर्गों में अभ्यास करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम ताकत और सहनशक्ति बढ़ाने के लिए अधिक वजन वाले पहलवानों तथा गति सुधारने के लिए 57 और 61 किग्रा भार वर्ग के पहलवानों के साथ अभ्यास करते हैं। इससे काफी मदद मिलती है।’’
सुजीत ने कहा कि उनका ध्यान इस साल होने वाले एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप पर है क्योंकि दोनों प्रतियोगिताएं काफी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेल चार साल में एक बार होते हैं और पिछली विश्व चैंपियनशिप में एक छोटी सी गलती के कारण मैं पदक से चूक गया था। मैं अपना पूरा प्रयास करूंगा। ये दोनों प्रतियोगिताएं मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं इन दोनों प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित करने की पूरी कोशिश करूंगा।’’
सुजीत से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं और उन्होंने कहा कि प्रशंसकों और सीनियर पहलवानों का समर्थन उन्हें प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इंस्टाग्राम पर टिप्पणियां देखता हूं और लोग मुझसे कहते हैं कि मैं पदक जीतूंगा। इससे मुझे प्रेरणा मिलती है, लेकिन हम केवल वर्तमान को ही नियंत्रित कर सकते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।’’
कुश्ती के अलावा सुजीत अपनी जिंदगी को सरल बनाए रखते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘खाली समय में मैं संगीत सुनता हूं, ताश खेलता हूं, कभी-कभार टीवी या फिल्में देखता हूं। कुश्ती के अलावा कुछ भी नियमित नहीं है।’’
