कैनबरा, 14 अप्रैल (द कन्वरसेशन) लेफ्टिनेंट जनरल सुसान कॉयल की नियुक्ति के साथ ही ऑस्ट्रेलिया को अपनी पहली महिला सेना प्रमुख मिलेगी।
कॉयल फिलहाल संयुक्त क्षमता विभाग की प्रमुख हैं। वह ऑस्ट्रेलियाई सेना में किसी भी शाखा की प्रमुख नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को नए सैन्य प्रमुखों की नियुक्तियों की घोषणा की। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब सरकार इस सप्ताह के अंत में रक्षा रणनीति और निवेश पर 2026 का अपना वक्तव्य जारी करेगी। ये नियुक्तियां जुलाई से प्रभावी होंगी।
नौसेना के प्रमुख वाइस एडमिरल मार्क हैमंड ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के प्रमुख अध्यक्ष होंगे। वह एडमिरल डेविड जॉनसन की जगह लेंगे।
हैमंड पनडुब्बियों और ऑस्ट्रेलियाई बेड़ों की कमान संभाल चुके हैं। वह 2022 से नौसेना प्रमुख हैं। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल (एडीएफ) के प्रमुख के रूप में लगातार दूसरे नौसेना अधिकारी होने के नाते हैमंड की विशेषज्ञता खासकर ‘‘एयूकेयूएस’’ समझौते को लेकर ऑस्ट्रेलिया के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
कॉयल 1987 में आर्मी रिजर्व में भर्ती हुई थीं। वह सामरिक, परिचालन और रणनीतिक स्तरों पर तथा कमान भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। इनमें टास्क ग्रुप अफगानिस्तान की कमांडर और 17वीं सिग्नल रेजिमेंट की कमांडिंग ऑफिसर की भूमिका शामिल हैं। वह लेफ्टिनेंट जनरल स्टुअर्ट की जगह सेना प्रमुख का पद संभालेंगी।
रियर एडमिरल मैथ्यू बकले को उप-प्रमुख के पद से पदोन्नत कर नौसेना प्रमुख बनाया गया।
रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि कॉयल की नियुक्ति ऑस्ट्रेलियाई सेना में महिलाओं के लिए, साथ ही भविष्य में इस सेवा से जुड़ने पर विचार कर रही महिलाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अल्बनीज और मार्ल्स की मौजूदगी में हैमंड ने पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य में मदद के अमेरिका के किसी भी अनुरोध का जवाब देने की ऑस्ट्रेलिया के पास नौसैनिक क्षमता है – लेकिन अभी तक ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है।
हैमंड ने कहा, “हमारे पास इस समय 10 युद्धपोत हैं, जिनमें से आठ अभी समुद्र में हैं। नौसेना पहले की तरह ही तैयार है।”
इससे पहले अल्बनीज ने कहा कि (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप द्वारा जलडमरूमध्य की नाकेबंदी में ऑस्ट्रेलिया से मदद नहीं मांगी गई है।
उन्होंने ‘एबीसी’ को बताया, “मैं शांति वार्ता की बहाली देखना चाहता हूं। हम इस संघर्ष को समाप्त होते हुए देखना चाहते हैं। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है, और यह जितना लंबा चलेगा, इसका प्रभाव उतना ही अधिक होगा, और इसके परिणाम भी उतने ही लंबे समय तक बने रहेंगे।”
अल्बनीज अपनी ईंधन कूटनीति यात्रा के तहत ब्रुनेई और मलेशिया की यात्रा करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने पिछले सप्ताह सिंगापुर का दौरा किया था।