सभी विपक्षी दलों के समर्थन के कारण परिसीमन विधेयक को रोक पाना संभव हुआ: स्टालिन

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चेन्नई, 18 अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को कहा कि परिसीमन विधेयक को रोकने में मिली “जीत” ‘इंडिया’ सहित सभी विपक्षी दलों के सांसदों के प्रयासों के कारण ही संभव हो पाई।

उन्होंने इस मुद्दे पर दृढ़ रुख अपनाने के लिए कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को धन्यवाद भी दिया।

‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) विपक्षी दलों का गठबंधन है।

केंद्र सरकार को उस वक्त एक बड़ा झटका लगा जब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 2029 से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने के उद्देश्य से लाया गया संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को पारित नहीं हो सका।

उन्होंने भाजपा की ओर इशारा करते हुए कहा, “इस परिसीमन विधेयक ने न केवल हमारे दोस्तों का खुलासा किया है, बल्कि तमिलनाडु के गद्दारों को भी बेनकाब कर दिया है। अगले चुनाव से पहले ही इन गद्दारों को करारी हार का सामना करना पड़ा है।”

यहां जारी एक वीडियो क्लिप में स्टालिन ने कहा, “आज मैं आपके सामने अत्यंत प्रसन्नता और नई ऊर्जा से परिपूर्ण होकर खड़ा हूं। परिसीमन विधेयक, जिसे काला कानून कहा जाता है, के विरुद्ध हमारा संघर्ष सफल रहा है। एक वर्ष से भी अधिक समय पहले हमने इस खतरे को भांप लिया था और उसी क्षण से हमने इस विजय को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सभी कार्य शुरू कर दिए थे।”

उन्होंने कहा कि “निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन की आड़ में” भाजपा को पूर्णतया लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया विधेयक संसद में पराजित हो गया। इसके लिए इंडिया गठबंधन सहित सभी विपक्षी दलों के सांसदों का धन्यवाद।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने महिला आरक्षण की आड़ में इस कानून को लाने की कोशिश की। लेकिन खुद महिलाओं ने ही इसका विरोध किया और उन्हें करारी हार मिली। मैं उन्हें सलाम करता हूं।”

स्टालिन ने कहा, “जो लोग हमें उत्तर और दक्षिण में बांटना चाहते थे और हमें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहते थे, उन्हें अब मुंह पर एक जोरदार और करारा तमाचा लगा है।”

उन्होंने कहा, “12 वर्षों में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को संवैधानिक संशोधन विधेयक में हार का सामना करना पड़ा है।”

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख ने कहा, “यह तो बस शुरुआत है। यह उन पराजयों की शुरुआत है जिनका सामना भाजपा को पूरे देश में करना पड़ेगा। यह विपक्षी दलों की एकता की शुरुआत है। मैं बार-बार कहता रहा हूं कि अगर हम एकजुट रहेंगे तो हमारी जीत निश्चित है।”

उन्होंने दावा किया, “मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि हमें 1950 और 60 के दशक की पुरानी द्रमुक को फिर से देखना पड़ सकता है। मैंने आज उन्हें स्पष्ट रूप से दिखा दिया है। देखिए, यही है द्रमुक।”

स्टालिन ने हालांकि कहा, “आज हमने जो हासिल किया है वह केवल आधी जीत है। जैसा कि 2001 में किया गया था, सीटों की संख्या का परिसीमन संवैधानिक रूप से अगले 25 वर्षों के लिए, यानी 2051 तक निलंबित किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हमारी जीत का क्रम जारी रहे और कई गुना बढ़ें और भाजपा को, जिसने तमिलनाडु के लोगों को उनके ही देश में शरणार्थी बनाने की कोशिश की, तथा उनके दासतुल्य एजेंट, अन्नाद्रमुक को, हम 2026 के विधानसभा चुनावों में इतनी बड़ी और अविस्मरणीय हार देंगे कि वे इसे कभी भुला न सकें।”

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