आजकल ज्यादातर लोग अस्पतालों तथा अंग्रेजी दवाइयों में इतने खो गये हैं कि उन्हें अपने आसपास उपलब्ध होने वाली उन शाक-सब्जियों की तरफ ध्यान देने का समय ही नहीं मिलता जो बिना किसी हानि के हमारी अनेक बीमारियों को निर्मूल करने में सक्षम हैं। इन्हीं में से एक है मूली।
मूली के सेवन से आंतों की गति तेज होती है तथा शरीर की गंदगी बाहर निकलती है। यह शरीर में स्फूर्ति, शक्ति और गर्मी पैदा करती है तथा शरीर को संक्रामक रोगों से बचाती है। मूली के बीज भी बहुत लाभदायक होते हैं। मूली के बीज पौष्टिक, दस्तावर, गैस निकालने वाले और मासिक धर्म को नियंत्रित करते हैं।
मूली के पत्तों का साग तथा सलाद खाने से पुराने से पुराना कब्ज, पीलिया, रक्तहीनता आदि रोग दूर होते हैं। मूली में पोटेशियम प्रचुर मात्रा में होने के कारण इसका प्रभाव बहुमूत्र तथा गुर्दे, हृदय, रक्तवाहिनियों के लिए अति उपयोगी होता है।
भोजन के साथ या भोजन के बाद मूली खाना विशेष रूप से लाभदायक है। मूली और इसके पत्ते भोजन को ठीक प्रचार से पचाने में सहायता करते हैं। वैसे तो मूली के परांठे, तरकारी, अचार तथा भुजिया जैसे अनेक स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं लेकिन सबसे अधिक लाभकारी होती है कच्ची मूली। भोजन के साथ प्रतिदिन एक मूली खा लेने से व्यक्ति अनेक बीमारियों से मुक्त रह सकता है।
मूली स्वादिष्ट और पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है। मूली में जीवनरक्षक पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, सी एवं बी काम्पलेक्स समूह के विटामिन जैसे थायमिन राइबोफ्लेविन तथा नायसिन आदि उचित मात्रा में पाये जाते हैं। मूली में खनिज लवण, कैल्शियम फास्फोरस तथा लौह तत्व आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
कंद के साथ मूली की पत्तियां भी बहुत उपयोगी होती हैं। सामान्यतः हम मूली को खाकर उसके पत्तों को फेंक देते हैं जोकि स्वास्थ्य की दृष्टि से गलत है क्योंकि मूली की पत्तियों में भी विटामिन ए, सी एवं बी काम्पलेक्स समूह के विटामिन जैसे थायमीन राइबोफ्लेविन तथा नायसिन आदि एवं खनिज लवण कैल्शियम, फास्फोरस तथा लौह तत्व आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। अतः मूली के साथ इसके पत्तों का सेवन भी किया जाना चाहिए। मूली में क्षार तत्व सोडियम तथा क्लोरीन पाए जाते हैं। क्षार तत्व सोडियम गलाने का कार्य करते हैं तथा क्लोरीन सफाई करती है।
मूली शरीर से विषैली गैस कार्बन डाई आक्साइड को निकालकर जीवनदायी आक्सीजन प्रदान करती है। मूली हमारे दांतों को मजबूत करती है तथा हड्डियों को शक्ति प्रदान करती है। इससे व्यक्ति की थकान मिटती है और अच्छी नींद आती है। मूली खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित तथा बबासीर और हृदय रोग को शांत करती है।
प्रस्तुत हैं मूली के औषधीय गुणों पर एक नजर:
नियमित रूप से मूली का सेवन करने से पाचन शक्ति ठीक रहती है, भूख में वृद्धि होती है व रंग साफ होता है।
प्रातः मूली का प्रयोग रामबाण दवा का काम करता है। दिन में खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
मूली के रस में समान मात्रा में अनार का रस मिलाकर पीने से रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ता है और रक्त की कमी (अनीमिया रोग) दूर होती है।
मासिक धर्म के रूकने पर मूली के बीजों का चूर्ण तीन-तीन ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से फायदा होता है।
गैस व पीलिया के रोगियों को मूली तथा मूली के पत्ते नियमित खाने से लाभ होता है।
मधुमेह, दमा, अनीमिया की कमी, पथरी, मुंहासे, दंत रोग व चर्म रोगों में मूली का सेवन फायदेमंद रहता है। प्रातः काल खाली पेट मूली खाना सर्वाधिक लाभकारी रहता है।
गठिया की समस्या से परेशान रोगियों को मूली, पत्तागोभी व अदरक का मिश्रित रस पीना चाहिए। इससे काफी फायदा होता है।
इसके रस में थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा कम होता है और शरीर सुडौल बना रहता है।
बार-बार हिचकी आने पर मूली के चार पांच कोमल पत्ते चबा चबा कर खाने से लाभ होता है।
एक कप मूली के रस में एक चम्मच नींबू का रस व एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर प्रतिदिन पीने से पेट की बीमारियां जैसे – कब्ज, अग्निमांध, अफारा और खाने में अरूचि का भाव दूर हो होता है।
मूली के बीजों को उसके पत्तों के रस के साथ पीसकर लेप करने में दाद, खाज, खुजी तथा सभी प्रकार के चर्म रोगों में फायदा होता है।
अजवायन को 20-25 ग्राम मूली का रस के साथ चार-चार घंटे बाद दो से तीन माह तक नित्य पीने से पथरी चूर-चूर होकर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।
पेशाब करते समय यदि जलन होती हो तो मूली का रस 15 दिनों तक नियमित रूप से पीने पर पेशाब की जलन और तकलीफ में राहत मिलती है।
रोजाना दोपहर में भोजन के साथ कच्ची मूली के सलाद में काली मिर्च चूर्ण मिलाकर सेवन करने से रंग साफ, बाल लंबे होते हैं तथा बालों से संबंधित समस्याएं भी दूर होती हैं।
सांवली रंगत को निखारने और चेहरे की झुर्रियां दूर करने के लिए मूली के रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर चेहरे, गर्दन, हाथ व पैरों पर लगाना चाहिए तथा सूखने पर धो लेना चाहिए।
जिन लोगों को हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है उन लोगों को प्रतिदिन मूली की सब्जी खाने से लाभ होता है।
पानी में मूली का रस मिलाकर सिर धोने से जुंएं नष्ट होती है।
सावधानियां
रात में मूली का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है।
मूली खाने के साथ दूध, दही, खीर जैसी वस्तुएं कभी नहीं खानी चाहिए।
जहां तक संभव हो, कच्ची मूली का ही अधिक सेवन करना चाहिए।
हरी मूली को कभी खाने में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें सोलेनिन नामक टाक्सिन की मात्रा अधिक होती है जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। यह पेट व दूसरी नसों पर बुरा असर छोड़ता है।
मूली को अधिक पानी में नहीं उबालना चाहिए क्योंकि अधिक पानी में उबालने से मूली के विटामिन आधे से ज्यादा खत्म हो जाते हैं।
