जम्मू, 10 फरवरी (भाषा) प्रस्तावित वैष्णो देवी रोपवे परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर विधानसभा को सूचित किया कि परियोजना को मंजूरी उनके मंत्रिमंडल ने नहीं बल्कि उपराज्यपाल द्वारा दी गई थी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के विधायक नजीर अहमद गुरेजी और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक बलदेव राज शर्मा से इस मुद्दे पर सदन को ‘गुमराह’ करने के आरोप में इस्तीफा देने की मांग की।
इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अब्दुल्ला ने सदन को सूचित किया कि शर्मा ने रोपवे को उनके मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने का दावा किया था, जिसके बाद उन्होंने रिकॉर्ड की जांच की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने प्रासंगिक दस्तावेजों की तलाश करके तथ्यों को सत्यापित करने का प्रयास किया। मैंने यह जांच की कि क्या मंत्रिमंडल द्वारा कोई अनुमोदन दिया गया था और ऐसा कोई अनुमोदन नहीं था।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने तब पता लगाया कि उपराज्यपाल के समक्ष उनकी यात्रा के दौरान सितंबर 2024 में इस मुद्दे को रखा गया था और उन्होंने सक्षम प्राधिकारी होने के नाते इसे मंजूरी दे दी थी। यह मंजूरी सरकार गठन से लगभग एक महीने पहले दी गई थी। इस मामले को मंत्रिमंडल ने कोई मंजूरी नहीं दी है।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि वह विधानसभा से रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की मांग करते हैं, क्योंकि ‘‘यहां सदन को और सदन के माध्यम से जनता को गुमराह करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक ने भावुक होकर इस्तीफा देने की बात कही, लेकिन ‘‘हम न तो इसे प्रोत्साहित करते हैं और न ही उकसाते हैं। मैं केवल सच्चाई सामने लाना चाहता हूं।’’
वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों के लिए आधार शिविर कटरा के स्थानीय लोग 250 करोड़ रुपये की रोपवे परियोजना का विरोध कर रहे हैं। ये रोपवे गुफा मंदिर तक जाने वाले 12 किलोमीटर लंबी खड़ी चढ़ाई के रास्ते वाले तारकोटे मार्ग को सांझी छत से जोड़ेगा।
भाजपा विधायक पर निशाना साधते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘लोगों की भावनाओं और आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करो। तुम किस तरह के हिंदू हो? हम भी हिंदू हैं, लेकिन हम अपने धर्म की राजनीति नहीं करते।’’