नयी दिल्ली, 30 नवंबर (भाषा) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भारतीय शेयर बाजार में फिर बिकवाल बन गए है। अक्टूबर में थोड़े ठहराव के बाद विदेशी निवेशकों ने नवंबर में भारतीय शेयरों से शुरू रूप से 3,765 करोड़ रुपये निकाले हैं। ऐसा वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की क्षमता में कमी, वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी शेयरों में उतार-चढ़ाव और प्राथमिक बाजार को प्राथमिकता देने की वजह से हुआ है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले अक्टूबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में14,610 करोड़ रुपये डाले थे। वहीं सितंबर में उन्होंने 23,885 करोड़ रुपये, अगस्त में 34,990 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये की निकासी की थी।
नवंबर में एफपीआई की निकासी में वैश्विक और घरेलू कारकों दोनों की भूमिका रही।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर कटौती के रुख को लेकर अनिश्चितता, डॉलर में मजबूती, उभरते बाजारों में जोखिम लेने की श्रमता कमजोर होने से विदेशी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भी एफपीआई की धारणा प्रभावित हुई।’’
एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि नवंबर में निकासी की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा, प्रौद्योगिकी शेयरों में उतार-चढ़ाव रही है। इसके अलावा उपभोक्ता सेवाएं और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के शेयर भी इससे प्रभावित हुए।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का मानना है कि एफपीआई प्रवाह में रुख में बदलाव का अभी कोई साफ सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि एफपीआई कुछ दिन खरीदार थे और कुछ दिन बिकवाल। यह एक संकेत है कि हालात बदलने पर उनके प्रवाह का रुख बदल सकता है।
वर्ष 2025 में अब तक, एफपीआई ने शेयरों से 1.43 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा निकाले हैं। इस बीच, ऋण या बॉन्ड बाजार में एफपीआई ने सामान्य सीमा के तहत 8,114 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। वहीं इसी अवधि के दौरान उन्होंने स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग से 5,053 करोड़ रुपये निकाले हैं।