क्यों झड़ते हैं सिर के बाल?

बाल सुन्दरता को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाते हैं।   सिर के चिकने व मुलायम बाल न सिर्फ व्यक्ति की सुन्दरता को ही बढ़ाते हैं बल्कि वे स्वस्थ स्वास्थ्य के दर्पण भी माने जाते हैं। अगर ये ही बाल एक-एक करके या समूह में झड़कर या टूटकर सिर से नीचे आने लगते हैं तो व्यक्ति के लिए एक चिन्ताजनक विषय बन जाता है।


स्त्रा एवं पुरूष दोनों ही असमय बालों के गिरने से परेशान दिखाई देते हैं। अगर इसका समय पर निदान व उपचार न किया जाय तो एक समय ऐसी स्थिति भी आ सकती है जब व्यक्ति बालविहीन सिर  को प्राप्त कर जाता है।


आखिर क्यों होता है यह रोग? क्या इसको रोका नहीं जा सकता? कैसे मिट सकता है गंजापन? इन सभी बातों की जानकारी होने पर ही हम अपने काले-काले और घुंघराले बालों को असमय गिरने और सफेद होने से रोक सकते हैं। अनजाने में हम तरह-तरह के तेल, शैम्पू एवं क्रीमों का प्रयोग करते रहते हैं और जब इनसे भी बालों का गिरना नहीं रूकता, तब हारकर यही सोच बैठते हैं कि यह लाइलाज रोग है।


किसी भी समस्या के पीछे कोई न कोई खास कारण अवश्य होता है। समाधान के उपाय करने से पहले हमें यह ढूंढ निकालना चाहिए कि समस्या का सही कारण (मूल वजह) क्या है? सबसे पहले हमें मूल कारण को ढूंढकर उसे दूर करना होगा अन्यथा उपचार की सारी कोशिशें बेकार हो सकती हैं। बाल झड़ने की समस्या से महिला एवं पुरूष दोनों को ही वर्तमान समय में जूझना पड़ रहा है। इस समस्या से ग्रस्त पीड़ित लोगों के अन्दर हीन भावना समाती चली जाती है। उनको हमेशा यह चिन्ता सताती रहती है कि कहीं वे गंजे न बन जाएं। इस चिन्ता के फलस्वरूप उनकी दिनचर्या अनियमित एवं असामान्य होने लगती है तथा उदासी एवं तनाव का आना शुरू हो जाता है।


बालों के गिरने की समस्या का सही कारण जानने का प्रयास करना, उसकी आधी चिकित्सा है। यहां पर कुछ ऐसे कारण बताये जा रहे हैं। जिनके कारण बालों के गिरने की समस्या उत्पन्न होती है। आप भी इन कारणों को जानकर इस बात को तय कर सकते हैं कि आपकी समस्या नीचे बताये गये किसी कारण से तो संबंध नहीं रखती।


शरीर में विभिन्न रोगों के प्रभाव के कारण जैसे-रक्ताल्पता, थाइराइड के स्राव का असंतुलन, प्रसव के बाद का असर, एक्सरे का अधिक प्रभाव, अधिक तीव्र बुखार, ल्यूकोरिया, सिफलिस आदि के कुप्रभावों के कारण सिर के बाल टूटने या झड़ने लगते हैं।


अंतःस्रावी (हार्मान) ग्रंथियों के स्रावों की न्यूनता होना, दांतों का कोई रोग-पायरिया आदि का होना, संतति निरोध (बर्थ-कन्ट्रोल) की गोलियों को निगलने की आदत,  आदि कारणों से भी बालों के टूटने या झड़ने की समस्या आ खड़ी होती है।


अत्यधिक मानसिक चिन्ता, विचार, बोझ या दबाव, अधिक भय, क्रोध, विषाद, व्यग्रता, कल्पना की अधिकता, बालों को अधिकतर खुले रखना, अनेक प्रकार के तेलों एवं शैम्पू का प्रयोग करने से भी बाल झड़ने या टूटने लगते हैं।


केमिकल से बने आधुनिक हेयर डाई का प्रयोग करना, स्प्रे, हेयर, ब्रश रोलर्स आदि आधुनिक प्रसाधनों का प्रयोग करना, माडर्न शैम्पू या अन्य मार्डन प्रसाधनों का नियमित प्रयोग करना, बालों में भूसी (रूसी), खुश्की, जूं आदि के होने से भी बाल झड़ने या टूटने लगते हैं।
आहार में पोषण तत्वों की कभी, अधिक उपवास करना, पीने के पानी में शुद्धिकरण हेतु मिलाये जाने वाले ‘क्लोरीन’ की अधिक मात्रा या अधिक क्षारीय जल को पीना या जल में फ्लोराइड क्षार तत्व की अधिकता के कारण भी बाल कमजोर होकर टूटने-झड़ने लगते हैं। बालों को अधिक कसकर बांधने की आदत, पेट में कीड़ों के उपद्रव के कारण या आनुविंंशकी कारणों से भी बाल झड़ते या टूटते रहते हैं।


गर्भावस्था के दौरान रक्ताल्पता अर्थात् शरीर में खून की कमी होने पर भी बाल गिरते है। प्रसव के उपरान्त भी बाल गिरते हैं। बच्चा होने के बाद बाल झड़ने की समस्या अस्थायी होती है जो कुछ दिनों के बाद स्वतः ही समाप्त हो जाती है।


बालों का रूखापन भी बाल झड़ने का कारण हो सकता है इसलिए बालों को इतना सूखने नहीं देना चाहिए कि उनकी नमी ही समाप्त हो जाये। गर्मी के मौसम में धूप की तेजी के कारण तथा वर्षा ऋतु में वातावरण में व्याप्त अधिक नमी के कारण से भी बालों का टूटना-झड़ना प्रारम्भ हो जाता है।


बालों के झड़ने-टूटने से रोकने के लिए लक्षणों के अनुसार कारगर उपाय करना अत्यन्त आवश्यक होता है।