स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है तंबाकू

चाहे छोटे से छोटा गांव हो अथवा बड़े से बड़ा शहर, कोई भी स्थान नशे की महामारी से बचा हुआ नहीं है। ’विश्व स्वास्थ्य संगठन‘ की रिपोर्टो के अनुसार विश्व के किसी भी भाग में प्रति 8 सैकण्ड में एक व्यक्ति की मृत्यु तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन से हो रही है एवं प्रतिवर्ष विश्व में तंबाकू जनित रोगों के प्रसार से मरने वालों की संख्या कम होने के स्थान पर निरन्तर प्रतिवर्ष बढ़ती ही जा रही है।


तंबाकू, गुटखा, जर्दा, पान, बीड़ी-सिगरेट, अफीम, चरस, गांजा इत्यादि नशे के सेवन से मुंह में घातक रोग कैंसर हो जाता है, दांत पायरियाग्रस्त हो जाते हैं एवं जबड़ों की हड्डी तेजी से गलने-सड़ने लगती है। तंबाकू चबाने से दांत कमजोर होकर घिसने के साथ-साथ टूटने के शिकार भी हो जाते हैं। मुंह बंद होने की कगार पर पहुंच जाता है जिससे भोजन करने-चबाने में कठिनाई का आभास होने लगता है क्योंकि तब जबड़ों का खुलना ही मुश्किल हो जाता है।


तंबाकू हमारे स्वास्थ्य के लिए जानलेवा धीमे जहर का कार्य करते हुए दिल दहला देने वाले रोगों को अनायास ही आमंत्राण दे डालता है।


सार्वजनिक स्थानों पर वाहन चालकों से लेकर यात्रियों, कार्यालयों में अधिकारी से लेकर चपरासी, विद्यालयों में अध्यापक से लेकर विद्यार्थियों, दुकानों में मालिक से लेकर कर्मचारी एवं घर में पिता से लेकर पुत्रा तक अर्थात् हर स्तर पर, हर पल पर हर क्षण तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन महामारी की तरह फल-फूल रहा है जो किसी अकाल विभीषिका से कम नहीं है।


नशा तो मनुष्य के स्वास्थ्य, धन, परिवार पर साथ-साथ डाका डालते हुए तब तक पीछा नहीं छोड़ता जब तक कि मनुष्य रोगग्रस्त होकर चिता तक नहीं पहुंच जाता अर्थात हर तरफ नुक्सान ही नुक्सान है।


बीड़ी-सिगरेट अथवा सिगार के धुएं के घातक रासायनिक तत्व और गैसें होती हैं जिनमें निकोटिन मुख्य है। निकोटिन सफेद रंग का अत्यंत जहरीला तत्व होता है। कहा जाता है कि यदि निकोटिन की एक शुद्ध बूंद भी किसी मनुष्य के शरीर में इंजेक्शन द्वारा प्रवेश करा दी जावे तो अकाल मृत्यु भी हो सकती है। जो लोग प्रतिदिन बहुत अधिक बीड़ी-सिगरेट पीने के आदी हो जाते हैं तो धूम्रपान से निकली जहरीली निकोटिन स्वतः उनके शरीर में समाहित हो जाती है जो रोगों का मुख्य कारण है।


धूम्रपान करने वाले की तत्काल मृत्यु नहीं होती क्योंकि एक बार एक ही समय निकोटिन की जितनी मात्रा वह  ग्रहण कर रहा होता है, घातक सीमा से बहुत कम होती है किन्तु स्वास्थ्य पर कुप्रभाव निरन्तर बढ़ता चला जाता है। सिगरेट का धुआं मनुष्य की श्वांस प्रणाली को अवरूद्ध कर देता है।


निकोटिन जहर के अतिरिक्त धूम्रपान से छोड़े गए धुएं में विषैली गैस हानिकारक तत्त्व जैसे कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन साईनाइड, पाईरीडन, अमोनिया एलडेहाइड आदि विद्यमान होते हैं। जहरीला धुआं मुंह गले से होकर होते हुए शरीर की वायु नलियों द्वारा फेफड़ों में प्रवेश कर विष जमा करने का कार्य करता है जिससे फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना अधिक हो जाती है। धूम्रपान करने वालों की संतान जन्म लेने से पूर्व ही कई रोगों से ग्रसित हो जाती है।


तंबाकू से होने वाली घातक बीमारियों के भीषण परिणाम
तंबाकू, पान, जर्दा, गुटखा चबाने से मुंह में, जुबान, भोजन, नली एवं वायु नली में कैंसर होने की संभावना सदैव बनी रहती है।


धूम्रपान से भयानक रोग काली खांसी आ घेरती है। जहरीले धुएं से फैंफड़ों में जीवन रक्षक वायु के प्रभाव में अवरोध उत्पन्न हो जाता है जिससे फैंफड़ों की वायु नलियां क्षति ग्रस्त हाने लग जाती हैं। कहा जाता है कि यह जानलेवा बीमारी मनुष्य का जीवन भर साथ ही नहीं छोड़ती।


धूम्रपान से सिर दर्द होना, हाथ-पैर टूटना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन रहना स्वाभाविक प्रक्रिया है। धूम्रपान की अधिकता से आंखों की ज्योति एवं कानों से सुनने की शक्ति क्षीण होती चली जाती है।


धूम्रपान से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। तंबाकू विष निकोटिन धुएं में विद्यमान रहता है और हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचने वाली नलिकाओं को कठोर एवं मोटा कर देता है। परिणामस्वरूप रक्त वाहिनी नलिकाओं का लचीलापन एवं नम्रता समाप्त होती चली जाती है। रक्त संचार में इस प्रकार बाधा पड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाने के अतिरिक्त हृदय को मिलने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होने लगती है जिससे हृदय भारी हो जाता है। रोग अधिक बढ़ने से हृदय सुचारू कार्य करने में असमर्थ हो जाता है जो हृदयाघात से अकाल मृत्यु का कारण बन सकता है।


धूम्रपान से मनुष्य की आयु कम होने लगती है जो अनुभवों एवं वैज्ञानिक परीक्षणों के प्राप्त आंकड़ों से प्रमाणित हो चुका है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मात्रा एक सिगरेट के सेवन से ही आयु के 6 मिनट तक कम हो जाते हैं अर्थात जितना अधिक तंबाकू सेवन, उतनी कम जीवन आयु।


तंबाकू , पान, गुटखा खाने से भूख कम हो जाती है, मुंह का स्वाद खराब होने लगता है, सुनने की शक्ति कमजोर कर मुंह से दुर्गंध आने लगती है।


घर, परिवार, सिनेमाहॉल, सभास्थल, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रा, बस-रेल के डिब्बे इत्यादि में यदि कोई धूम्रपान करता है तो उसके आस-पास बैठे व्यक्ति स्वाभाविक ही ’पैसिव स्मोकिंग‘ के माध्यम से कई जानलेवा बीमारियों के शिकार हो जाते हैं जिसमें हृदयाघात 33 प्रतिशत, ब्लड कैंसर 40 प्रतिशत, फेफड़ों की बीमारी 50 प्रतिशत, बाल मृत्यु दर 33 प्रतिशत एवं प्रसव के समय कमजोर शिशु का होना 25 प्रतिशत तक की संभावना बनी रहती है।
नशे से होने वाले कुप्रभावों पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लीजिए जो कि सर्वथा आपके हाथ में है कि स्वास्थ्य चाहिए अथवा बीमारी? सुख चाहिए अथवा दुःख? जीवन चाहिए अथवा मृत्यु? तो हो जाइये तैयार और आज से ही छोड़ दीजिए समस्त नशों का सेवन।