बाल कथा- दूध वाला

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दीपक के घर दूध सरकारी टंकी से आता था, एक बड़ी सी टंकी जिसके दोनों ओर सील लगी होती। यह टंकी रिक्शा की भांति तीन पहियों पर टिकी होती।
पिछले कुछ दिनों से दूध पहले जैसा गाढ़ा नहीं रहा था, यह वह मम्मी से रोज ही सुनता था। साथ ही पानी मिलाने का शक दूध वाले पर नहीं किया जा सकता था क्योंकि टंकी की दोनों सील सही सलामत होती थी। दीपक को लगता था कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है नहीं तो भला एकाएक दूध इस तरह पतला कैसे हो सकता है।
दीपक रोज सुबह सैर के इरादे से साइकिल पर चढ़कर उधर दूर वाले पार्क में जाता था। उस दिन वह और दिनों की अपेक्षा जल्दी ही निकल पड़ा। अभी दिन पूरी तरह नहीं निकला था। रास्ते में एक स्थान पर उसने देखा उनका दूध बांटने वाला व्यक्ति टंकी का ढक्कन उठाकर उसमें पानी डाल रहा था। उसने पानी की बाल्टी दूध में डालने के पश्चात् ढक्कन बंद किया और माचिस की तीली जलाकर लाख की सील पुनः लगा दी। फिर वह निश्चिन्त होकर टंकी वाली रिक्शा को वहीं छोड़, सामने वाले खोखे पर चाय पीने चला गया।
यह सब देखकर दीपक ने साइकिल रोक दी। उसे दूध वाले की इस होशियारी पर बहुत गुस्सा आया और उसने इसे सबक सिखाने की ठान ली। तभी उसे एक उपाय सूझा। वह साइकिल खड़ी करके चुपचाप रिक्शा के पास पहुंचा और एक पहिये की हवा निकाल दी तथा दूसरी ओर थोड़ा दूर खड़ा होकर दूधवाले के आने का इन्तजार करने लगा।
कुछ ही देर में दूधवाला टंकी के पास पहुंचा। जब वह रिक्शा चलाने लगा तो उसे मालूम हुआ कि एक टायर पंक्चर हो गया है। इतनी भारी टंकी को पंक्चर हुए टायर पर ही ले जाना वाकई मुसीबत थी। वह खड़ा हुआ कुछ सोच ही रहा था कि दीपक अपनी साइकिल लेकर वहां पहुंचा। बोला-’नमस्ते सजन सिंह, सुबह-सुबह किस सोच में डूबे हो?‘
‘अरे दीपक तुम, क्या बताऊं मेरी रिक्शा पंक्चर हो गयी है। तुम मेरी मदद करोगें?‘
’हां, हां जरूर। कहिये क्या करना है‘
’तुम साईकिल लेकर दूधवाले दफ्तर जाओ। वहां….‘
’मगर यह दूध का दफ्तर है किधर?‘ दीपक ने बात बीच में ही काटते हुए पूछा।
’यह बड़े पुल के साथ वाली सड़क पर, रंजन सिनेमा के पीछे। वहां घुसते ही दाएं हाथ को एक छोटा केबिन हैं। उसमें जाकर कह देना टंकी नंबर नौ वाली रिक्शा पंक्चर हो गयी है। वे दूसरी रिक्शा भेज देंगे। हां, जरा जल्दी करना‘ दूधवाले ने उसे समझाया।
’ठीक है, अभी जाता हूं‘ यह कहकर दीपक अपनी साइकिल पर सवार होकर तेजी से उस दफ्तर में जा पहुंचा। वहां वह बड़े साहब का आफिस पूछकर उसमें जा घुसा व उन्हें सारी बात  बता दी। बड़े साहब खुद जीप में वहां पहुंचे और अपने सामने उस टंकी के दूध की जांच करवायी। जांच में साबित हो गया कि वाकई दूध में पानी मिला हुआ था। सजन सिंह को नौकरी से हटा दिया गया।
सभी नन्हें दीपक की होशियारी पर हैरान थे।

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