आरपीएससी 713 अभ्यर्थियों के बजाय केवल एक को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे : न्यायालय

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नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दो अप्रैल के अपने आदेश में संशोधन करते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को शुक्रवार को निर्देश दिया कि वह पांच-छह अप्रैल को निर्धारित पुलिस उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2025 में 713 अभ्यर्थियों के बजाय केवल एक उम्मीदवार को ही बैठने की अनुमति दे।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ शुक्रवार को अवकाश के दिन बैठी और आरपीएससी को राहत देते हुए बृहस्पतिवार के अपने आदेश में संशोधन किया।

आरपीएससी 1,015 पुलिस उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर की भर्ती के लिए पांच-छह अप्रैल को परीक्षा आयोजित करेगा, जिसमें 77 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।

शीर्ष अदालत ने आरपीएससी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पीठ से महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं।

न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आयोग को मामले में अदालत का रुख करने वाले सूरज मल मीणा सहित 713 अभ्यर्थियों को अनंतिम प्रवेश पत्र जारी करने का आदेश दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि उसके आदेश के अनुसार परीक्षा में बैठने वाले इन अभ्यर्थियों के परिणाम तब तक प्रकाशित नहीं किए जाएंगे, जब तक कि राजस्थान उच्च न्यायालय उससे (परीक्षा) संबंधित दो अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला नहीं सुना देता।

न्यायालय ने शुक्रवार को आरपीएससी के वकील की दलीलों का संज्ञान लेते हुए अपने आदेश में संशोधन किया और सिर्फ मीणा को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश दिया।

हालांकि, पीठ ने कहा कि अन्य अभ्यर्थी, जिन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर नहीं की है, उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं और अगर लंबित फैसले में आरपीएससी को उनके लिए एक और परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया जाता है, तो वे परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का अनुरोध कर सकते हैं।

राजस्थान में उपनिरीक्षकों और प्लाटून कमांडर की भर्ती परीक्षा को बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कदाचार के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था।

आरपीएससी ने उन अभ्यर्थियों को आयु में कोई छूट दिए बिना दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया, जिन्हें इस आधार पर परीक्षा देने से रोक दिया गया था।

फैसले के खिलाफ जयपुर उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की गई, जिसने अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अस्थायी अनुमति दे दी।

हालांकि, बाद में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके चलते अभ्यर्थियों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

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