विशाखापत्तनम, तीन अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वदेश निर्मित उन्नत युद्धपोत तारागिरी को शुक्रवार को यहां नौसेना के बेड़े में शामिल करने जा रहे हैं, जो भारत के पूर्वी तट के सामरिक महत्व को रेखांकित करता है।
पूर्वी नौसेना कमान के एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार, यह समारोह यहां नौसैनिक डॉकयार्ड में वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।
सिंह ने बृहस्पतिवार देर रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं विशाखापत्तनम में उन्नत युद्धपोत तारागिरी का जलावतरण करने जाऊंगा…इसे बेड़े में शामिल करना भारत के पूर्वी समुद्री तट के सामरिक और समुद्री महत्व को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा कि इसे बेड़े में शामिल करना भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और संचालन शक्ति को मजबूत करने पर लगातार ध्यान देने को दर्शाती है।
‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत चौथे प्लेटफॉर्म के रूप में तारागिरी 6,670 टन का युद्धपोत है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा बनाया गया है, जो उन्नत डिजाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।
इस युद्धपोत की बनावट अधिक पतली है, जिससे इसका रडार पर दिखाई देने वाला आकार बहुत कम हो जाता है और यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहने में सक्षम है।
यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और भारत के घरेलू रक्षा तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
तारागिरी में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है।
यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे उभरते खतरों का तेजी और सटीकता से सामना किया जा सकता है।
युद्धक भूमिका के अलावा तारागिरी को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे शांति और संघर्ष दोनों स्थितियों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।
एक विज्ञप्ति के अनुसार, इसे बेड़े में शामिल करना भारतीय नौसेना की युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बल के रूप में विकसित होने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो देश के समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।