कोलकाता, 31 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अवैध मतदाताओं के नाम राज्य की मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही है ताकि चुनाव परिणाम को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।
बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में एक चुनावी रैली में यह बात कही। उन्होंने रैली में अपनी अपील दोहराई कि जनता इस पर ध्यान न दे कि विधानसभा क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कौन हैं बल्कि उन्हें ही (ममता बनर्जी को) सभी 294 सीटों पर उम्मीदवार मानें।
तृणमूल प्रमुख ने कहा, ‘‘ कल अभिषेक (बनर्जी) ने मुझे बताया कि नए मतदाताओं को शामिल करने के लिए एक ही दिन में लगभग 30,000 फॉर्म जमा होने की सूचना मिलने पर उन्हें अपने चुनाव प्रचार कार्यक्रम के बीच से ही कोलकाता स्थित निर्वाचन आयोग कार्यालय जाना पड़ा।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ भाजपा बिहार, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अवैध मतदाताओं को बंगाल की मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही है। वे बिहार की तरह ही रेल के माध्यम से बाहरी मतदाताओं को लाने की योजना बना रहे हैं।’’
इस बीच ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर तीखे लहजे में कहा कि जिनका बंगाल से कोई वैध संबंध नहीं है, उनसे संबंधित फॉर्म 6 के आवेदन “अवैध, असंवैधानिक और मौलिक रूप से अलोकतांत्रिक” हैं, जो दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा बंगाल की मतदाता सूची में “बाहर से अवैध मतदाताओं को जबरदस्ती शामिल करने” की कोशिश करती है, तो लोग इसका विरोध करेंगे।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने गरबेटा में अपनी दूसरी चुनावी रैली में कहा, “उसे एक भी वोट नहीं मिलेगा क्योंकि बंगाल के लोग जानते हैं कि भाजपा ने बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह चाल चली है और वहां विपक्ष के इस हथकंडे को नहीं समझ पाने के कारण बच गई।”
उन्होंने दावा किया कि भाजपा के मन में बंगाल और राज्य के लोगों के लिए “कोई सम्मान नहीं” है। उन्होंने भाजपा पर निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत करने और ‘एसआईआर’ प्रक्रिया की आड़ में राज्य की मतदाता सूची से महिलाओं और अल्पसंख्यकों के नाम हटाने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने कहा, “हिंदू, आदिवासी, मुस्लिम और अनुसूचित जाति समुदायों की माताओं और बहनों के साथ-साथ बुजुर्ग नागरिकों की तस्वीरें देखकर मेरा दिल टूट गया, जो पूरक सूची (एसआईआर) से अपना नाम हटाए जाने के बाद न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील के लिए एक बार फिर कतारों में खड़े थे। एसआईआर का अर्थ है ‘सर्वनाश’ (विनाश)।”
उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय में उनकी चुनौती के कारण ही निर्वाचन आयोग ने 22 लाख नाम मतदाता सूची में जोड़े।
पूरक सूचियों से 18 लाख नाम हटाए जाने पर बनर्जी ने आरोप लगाया, “भाजपा और निर्वाचन आयोग लोगों की नागरिकता, उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन रहे हैं। हम हर कदम पर उनका मुकाबला करेंगे।”
गरबेटा रैली में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर उनकी पार्टी ने संघर्ष नहीं किया होता तो भाजपा बंगाल की मतदाता सूची से 5 करोड़ नाम हटा चुकी होती।
उन्होंने सभा में कहा, “अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में तृणमूल उम्मीदवार कौन है, इसे भूल जाइए, राज्य की सभी 294 सीटों पर मुझे अपना उम्मीदवार मानिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आयी तो वह बंगालियों के ‘‘मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगा देगी।’’ उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र द्वारा राज्य में परोक्ष रूप से ‘एनआरसी’ लागू करने के प्रयासों और लक्षित नागरिकों को निरूद्ध केंद्र में भेजने की योजनाओं को विफल कर देगी।
उन्होंने कहा, “भाजपा से सावधान रहें। वे आपके खान-पान पर रोक लगा देंगे, जैसा कि उन्होंने भाजपा शासित अन्य राज्यों में किया है…जब तक हम सत्ता में हैं, बंगाल में न तो निरूद्ध केंद्र होंगे और न ही एनआरसी लागू होगी।”
तृणमूल प्रमुख ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को गिराने का समय आ गया है, जिसने कथित तौर पर देश के सभी वैधानिक और संवैधानिक निकायों का राजनीतिकरण कर दिया है, जिससे नागरिकों को उनके अधिकारों और न्याय से वंचित होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “बंगाल में सत्ता में आने के बाद हम दिल्ली पर कब्जा करेंगे। भाजपा ने सभी संवैधानिक निकायों को अपने पार्टी कार्यालयों में बदल दिया है।’’
