नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत पिछले तीन वर्षों में तेलंगाना सरकार की ओर से सिंचाई परियोजनाओं के लिए कोई नया प्रस्ताव केंद्र को प्राप्त नहीं हुआ है।
प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में पीएमकेएसवाई के तहत 99 बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया था। इनमें से 71 परियोजनाएं लंबे समय तक अटकी हुई थीं।
उन्होंने कहा कि पीएमकेएसवाई का उद्देश्य खेतों तक पानी की पहुंच बढ़ाना, सिंचित क्षेत्र का विस्तार करना, जल उपयोग दक्षता में सुधार करना और जल संरक्षण के टिकाऊ उपायों को बढ़ावा देना है।
पाटिल ने बताया कि तेलंगाना की 11 परियोजनाएं पीएमकेएसवाई के तहत शामिल की गई थीं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से पिछले तीन वर्षों में किसी नई परियोजना के लिए आवेदन नहीं किया गया।
उन्होंने एक लिखित जवाब में बताया, “तेलंगाना की 11 परियोजनाएं पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के तहत शामिल की गई थीं, जिनके लिए 1,129.80 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत थी। इनमें से अब तक 981.49 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में तेलंगाना सरकार से केंद्रीय सहायता के लिए कोई पात्र प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
मंत्री ने बताया कि पीएमकेएसवाई के तहत ‘त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम’ (एआईबीपी) एक प्रमुख घटक है। इसके अंतर्गत तेलंगाना की 11 परियोजनाओं के जरिए 5.85 लाख हेक्टेयर की अंतिम सिंचाई क्षमता के मुकाबले अब तक 4.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है।
इसके अलावा, वर्ष 2015-16 से ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (पीडीएमसी) योजना के तहत राज्य में 3.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सूक्ष्म सिंचाई’ को विकसित किया गया है।
पाटिल ने कहा कि तेलंगाना सरकार की जानकारी के अनुसार, राज्य की पूर्ण हो चुकी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के क्षेत्र में कृषि उत्पादकता में लगभग 2.3 गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि पीडीएमसी योजना, जिसे कृषि विभाग लागू करता है, मार्च 2022 तक पीएमकेएसवाई के तहत संचालित की जा रही थी और अब इसे प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत लागू किया जा रहा है।
मंत्री के अनुसार, पीडीएमसी योजना के तहत तेलंगाना को कुल 873.95 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई है, जिसमें से 194.63 करोड़ रुपये पिछले तीन वर्षों के दौरान जारी किए गए हैं।