चीनी वीजा ‘घोटाला’ : अदालत ने कार्ति चिदंबरम की धनशोधन मामले में याचिका पर सुनवाई बंद की

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नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की उस याचिका पर सुनवाई शनिवार को बंद कर दी, जिसमें कथित चीनी वीजा घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से सांसद चिदंबरम ने संबंधित अनुसूचित अपराध, यानी वीजा घोटाला मामले में आरोप तय होने तक सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था। कथित वीजा घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।

कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई का अब कोई औचित्य नहीं है क्योंकि सुनवाई अदालत सीबीआई मामले में पहले ही आरोप तय कर चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला निष्फल हो गया है। इसलिए इसे इसी स्तर पर निष्फल मानकर निपटाया जा सकता है।’’

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आदेश दिया कि मामले का निस्तारण किया जाता है।

कार्ति चिदंबरम ने अप्रैल 2025 को दाखिल याचिका में सुनवाई अदालत के 28 मार्च, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें सीबीआई मामले में उनके खिलाफ आरोप तय होने तक धनशोधन के आरोपों पर बहस को स्थगित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

ईडी ने याचिका का विरोध किया और कहा कि उक्त अपराध और धनशोधन मामले में मुकदमे स्वतंत्र रूप से चल रहे हैं।

इसने 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने से जुड़े कथित घोटाले में कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया था। यह मामला तब का है जब उनके पिता पी चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे।

अक्टूबर 2024 में, सीबीआई ने 2011 में तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) नामक बिजली कंपनी के लिए चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा प्रदान करने में कथित रिश्वतखोरी के मामले में कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।

निचली अदालत ने 23 दिसंबर, 2025 को इस मामले में कार्ति और छह अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया। कार्ति ने इस आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है जिस पर सुनवाई लंबित है।

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