कैसे करें बच्चों की देखभाल घर से बाहर

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बच्चों को किसी भी मौसम में बाहर ले जाना बहुत मुश्किल होता है। हर मौसम में उचित देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। आइए देखें बाहर जाते समय बच्चों को कैसे ले जाया जाए ताकि मुश्किल आसान लगे-
 बच्चों को तेज़ धूप और तेज हवा से दूर रखना चाहिए। यदि मजबूरीवश धूप में जाना पड़े तो सिर पर टोपी, शरीर पर सूती हल्के वस्त्रा हल्के रंग के पहनाएं।
 धूप पर बाहर जाने से पहले बच्चों की बाजू व टांगों पर कपड़े अवश्य पहनाएं।
 धूप पर बाहर जाने से पहले बच्चों की बाजू, टांगों, चेहरे और गर्दन पर सनस्क्रीन लोशन लगाएं।
 बच्चों को हमेशा छाया वाले स्थान पर रखें। किसी भी मौसम में तेज धूप चेहरे पर न आए, इसका ध्यान रखें।
 बच्चों को मौसमानुसार वस्त्रा डालकर बाहर ले जाएं। अधिक सर्दी होने पर पूरे गर्म कपड़े पहनाएं और गर्मी में सूती हल्के वस्त्रा जो आसानी से पसीना सोख लें। अधिक गर्मी में बच्चों के वस्त्रा दिन में तीन चार बार बदलें।
 बच्चों को अधिक परिश्रम वाले व्यायाम एक दम शुरू न कराएं। धीरे धीरे व्यायाम बढ़ाएं।
 गर्मी में बच्चों को पानी अधिक मात्रा में दें ताकि पसीना अधिक निकलने पर शरीर में पानी की कमी न हो।
 बाहर जाते समय बच्चों के लिए पानी अपने साथ लेकर निकलें तथा खाने-पीने का सामान जैसे बिस्कुट, नमकीन, चिप्स आदि साथ रखें ताकि भूख प्यास लगने पर इधर उधर झांकना न पड़े।
 अपने साथ बैंड एड, थोड़ी रूई और एंटीसेप्टिक क्रीम साथ रखें। रास्ते में कहीं बच्चों को चोट लग जाने का प्रयोग में ला सकते हैं।
 स्वीमिंग पूल आदि में बच्चों को अकेला न छोड़ें। निर्देशक के सहारे ही छोड़ें।
 बच्चों के शरीर पर परफ्यूम या तेज सुगन्ध वाले साबुन का प्रयोग न करें।
 छोटे बच्चों को कार में ले जाते समय अपनी गोद में बैठाएं। थोडे़ बड़े बच्चे को पीछे वाली सीट पर बैठाएं और बच्चे को समझाएं कि अपनी बैक सीट के साथ लगा कर रखें।
 बच्चों के साथ सफर करते समय या पिकनिक पर साथ सुथरे स्थान पर खाना खाएं।
 दूर स्थान पर जाना हो तो बच्चों के मनोरंजन हेतु छोटा ट्रांजिस्टर, लूडो, सांप सीढ़ी, ब्लॉकस आदि गेम साथ में रखें ताकि बच्चे रास्ते में बोर न हों।
 सर्दियों में बच्चों की खुली त्वचा पर कोल्ड क्रीम लगाएं।
 सर्दियों में बच्चों को कपड़ों से लादें नहीं। उचित गर्म वस्त्र पहनाएं।
 नुमाइश या मेले में बच्चों को अपने से अलग न रखें।
 बच्चों को बचपन से स्वच्छ रखें ताकि बड़े होकर उनमें यह आदत बनी रहे।

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