हम गरीबी को पोषणहीनता या कुपोषण का सबसे बड़ा कारण मानते हैं। यह सत्य तो है पर कुछ हद तक ही। खाद्य पदार्थों का गलत चयन, पकाने की अनुचित विधियां और खाने से संबंधी आदतें भी पोषणहीनता का कारण हैं। कम खर्च करके भी हम पोषक आहार ले सकते हैं। जरूरत है तो बस ज्ञान की कि कौन सा पदार्थ कब, कितना और कैसे खाना, पकाना या खरीदना है। आइए, कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों और विधियों के बारे में जानें जिन्हें अपनाने से हमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकते हैं। खाद्य पदार्थों को आवश्यकता से अधिक देर तक तलना या गर्म नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से उनमें पाए जाने वाले विटामिन तथा अन्य पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। खाद्य पदार्थों को धीमी आंच पर ही पकाना चाहिए। उच्च ताप पर प्रोटीन कड़े हो जाते हैं जिनका पाचन कठिनता से होता है। खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए आवश्यकतानुसार ही जल का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि पकाने के बाद अतिरिक्त जल को फेंक देने से पोषक तत्वों की हानि हो जाती है। कुछ विटामिनों जैसे विटामिन-सी का आक्सीकरण शीघ्र हो जाता है। अतः कटे हुए फलों तथा सब्जियों को अधिक देर तक खुला नहीं छोड़ना चाहिए। कुछ सब्जियों के पत्ते भी खाने में स्वादिष्ट होते हैं। मूली तथा गोभी के पत्ते भी सब्जियों में डालकर पका लिए जाएं तो स्वाद भी बढ़ता है और पौष्टिकता भी। खाद्य पदार्थों को बार-बार धोने से उनमें पाए जाने वाले विटामिन बी-1 (थायमिन), बी-2 (राइबोफ्लेविन), बी-4 (नियासिन), सी (एस्कार्बिक अम्ल) जैसे विटामिन तथा खनिज जल में घुल कर बह जाते हैं। छिलका युक्त अनाज व दालों में पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। अतः छिलके रहित दालों व अनाज का प्रयोग कम करना चाहिए। दालों को अंकुरित करके ही खाना चाहिए। ऐसा करने से पोषक तत्वों में वृद्धि होती है। पालिश किए हुए चावलों की तुलना में सेला चावलों में अधिक प्रोटीन, विटामिन बी-2 तथा लौह तत्व होते हैं इसलिए पालिश किए गए चावलों का कम प्रयोग करना चाहिए। गेहूं से मैदा बनाने में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन ई, विटामिन-बी2, लौह तत्व तथा पेन्टर्थिनिक अम्ल नष्ट हो जाते हैं। मैदे की तुलना में आटे में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। आटे में से चोकर निकालने से भी पोषक तत्वों की हानि हो जाती है इसलिए आटे का प्रयोग चोकर सहित करना चाहिए। जितनी आवश्यकता हो, उतना ही भोजन पकाना चाहिए। भोजन को अधिक समय तक पका कर रखने और बार-बार गर्म करने से भी पोषक तत्वों की हानि होती है।