भोपाल, 23 मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री चेतन कुमार कश्यप ने उद्यमियों से अपील की है कि वे भौगोलिक संकेतक (जीआई) दर्जे का अधिकतम उपयोग कर रतलामी सेव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दें।
रतलाम की प्रसिद्ध कुरकुरी नमकीन रतलामी सेव को वर्ष 2014 में जीआई का दर्जा मिला था, जिसे 2024 में नवीनीकृत किया गया है।
भौगोलिक संकेतक यह प्रमाणित करता है कि कोई उत्पाद किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित है। यह उत्पाद की विशिष्टता को रेखांकित करता है, पारंपरिक उत्पादों की प्रामाणिकता की रक्षा करता है और क्षेत्रीय विरासत को बढ़ावा देता है।
रतलाम में रविवार को आयोजित ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) सम्मेलन को संबोधित करते हुए कश्यप ने कहा, “सभी को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि रतलामी सेव अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप विश्वस्तरीय उत्पाद बने।”
उन्होंने कहा कि ओडीओपी योजना का मुख्य उद्देश्य जीआई के दर्जे, ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से जिले के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से रतलामी सेव, शिवपुरी के जैकेट और मुरैना के गजक जैसे उत्पाद प्रदेश की पहचान बन गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रतलामी सेव का उल्लेख किया है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री एमएसएमई क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हैं और स्थानीय उद्यमों के विकास को प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक विकास को गति दी है और निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए औद्योगिक नीति को सरल किया है।
मंत्री ने उद्यमियों से जिले में आकर रतलामी सेव के कारोबार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया और इस दिशा में सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर कश्यप ने रतलामी सेव को जीआई दर्जा दिलाने वाले शैलेन्द्र गांधी को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में रतलामी सेव की उत्पत्ति, विकास यात्रा और विशेषताओं पर एक डिजिटल प्रस्तुति दी गई तथा प्रतिभागियों को इसके ऐतिहासिक और व्यावसायिक महत्व, विपणन और लॉजिस्टिक्स की जानकारी दी गई।
कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का योगदान 30 से 40 प्रतिशत है, जबकि उद्योग का योगदान 20 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य की औद्योगिक संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय और विदेशी निवेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है।