नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली सरकार की ओर से तीन बिजली वितरण कंपनियों को 38,000 करोड़ रुपये से अधिक के लंबित भुगतान की तैयारी किए जाने के बीच राष्ट्रीय राजधानी में अप्रैल से बिजली की दरों में वृद्धि होने की संभावना है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने हालांकि, बताया कि सरकार उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए बिजली शुल्क में वृद्धि पर रियायत देने की योजना बना रही है।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में निर्देश दिया था कि नियामकीय संपत्तियां जिनमें 27,200 करोड़ रुपये की वहन लागत भी शामिल है, दिल्ली की तीन निजी बिजली वितरण कंपनियों बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टीपीडीडीएल को सात वर्षों में दीं जाए।
दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने जनवरी में केंद्रीय एजेंसी, विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) को सूचित किया था कि दिल्ली में कुल नियामक परिसंपत्तियां 38,552 करोड़ रुपये हैं।
डीईआरसी ने कहा कि वसूली में देरी के कारण ब्याज जमा होने से मूल विनियामक परिसंपत्ति राशि में वृद्धि हुई है।
अदालत ने डीईआरसी को वसूली योजना तैयार करने, वहन लागत (ब्याज) का हिसाब रखने और लागत वसूली में हुई लंबी देरी का स्पष्टीकरण देने वाला विस्तृत ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया था।
यह वसूली सात वर्षों की अवधि में बिजली बिलों में नियामक परिसंपत्ति अधिभार बढ़ाकर की जाएगी।
दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि वितरण कंपनियों को विनियामक परिसंपत्तियों के रूप में जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने के लिए अधिकृत किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं।