पश्चिम एशिया संकट: पड़ोसी देशों से पहले घरेलू ईंधन जरूरतों को प्राथमिकता देगा भारत

0
sere444

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संकट और आपूर्ति में मची उथल-पुथल के बीच भारत, बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों के अनुरोधों पर विचार करने से पहले अपनी घरेलू ईंधन मांग को पूरा करने को प्राथमिकता देगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को यह जानकारी दी।

ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ का मंत्र देते हुए स्पष्ट किया कि देश की आंतरिक जरूरतों को पूरा करना सबसे पहली प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि घरेलू मांग पूरी होने के बाद यदि कोई अधिशेष बचता है, तभी सक्षम प्राधिकारी निर्यात के अनुरोधों पर कोई निर्णय लेंगे।

वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के कारण पैदा हुई किल्लत को देखते हुए बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों ने भारत से आपातकालीन ईंधन आपूर्ति का आग्रह किया है।

बांग्लादेश ने मौजूदा पाइपलाइन व्यवस्था के अलावा पांच हजार टन अतिरिक्त डीजल की मांग की है, वहीं नेपाल ने भी प्रति माह 3,000 टन अतिरिक्त रसोई गैस (एलपीजी) का अनुरोध किया है। भारत वर्तमान में नेपाल और भूटान को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की नियमित आपूर्ति करता है।

हालांकि, भारत के पास अपनी वार्षिक खपत से अधिक की शोधन क्षमता है, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल और रसोई गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और 60 प्रतिशत रसोई गैस आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ मार्ग से आता है। इस मार्ग में बाधा आने के कारण भारत अब रूस और अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *