नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को अप्रैल से जुलाई के बीच राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदायी देते हुए संसद को ‘‘एक खुला विश्वविद्यालय’’ करार दिया।
प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों से राष्ट्रीय जीवन में योगदान जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा ‘‘राजनीति में फुल स्टॉप नहीं होता।’’
उच्च सदन में मोदी ने कहा कि ऐसे क्षण स्वाभाविक रूप से पार्टीगत मतभेदों को भुला देते हैं। उन्होंने कहा ‘‘हम सभी में एक साझा भावना उत्पन्न होती है – यह एहसास कि हमारे सहयोगी अब अन्य प्रयासों को आगे बढ़ाने जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कुछ सदस्य पुन: सदन में आएंगे और कुछ नहीं आएंगे। ऐसे सदस्यों को प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा ‘‘राजनीति में फुल स्टॉप जैसी कोई चीज़ नहीं होती। भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव हमेशा हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा रहेगा।’’
मोदी ने तीन वरिष्ठ नेताओं – पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) प्रमुख शरद पवार की खास तौर पर सराहना की और उन्हें ऐसे स्तंभ बताया जिन्होंने अपने जीवन का आधे से अधिक समय संसदीय कार्यवाहियों में बिताया।
उन्होंने कहा ‘‘जिस तरह वे नियमित रूप से सदन आते हैं, कार्रवाई में इतनी निष्ठा के साथ भाग लेते हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है – यह एक ऐसी भावना है जिससे सभी नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए।’’
प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश की भी सराहना की। मोदी ने उन्हें ‘‘मृदुभाषी और विनम्र’’ लेकिन ‘‘कठोर कार्रवाई वाले व्यक्ति’’ बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि हरिवंश ने अवकाश काल के दौरान देशभर की यात्राएं कीं और युवाओं से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर संवाद किया।
उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ‘‘हमारे अठावले जी वास्तव में सदाबहार हैं। वह जा रहे हैं, फिर भी मुझे विश्वास है कि कोई खालीपन महसूस नहीं करेगा, वह लगातार सेवाएँ देते रहेंगे।’’
दो सदनों वाली संसदीय संरचना की प्रधानमंत्री ने विधेयक पारित करने की प्रक्रिया की तुलना ‘‘दूसरी राय लेने’’ (सेकेंड ओपीनियन) से की और कहा कि यह लोकतांत्रिक निर्णय लेने को मजबूत बनाता है।
उन्होंने कहा ‘‘एक सदन में लिए गए निर्णय को दूसरे सदन में दूसरी राय के लिए भेजा जाता है। यह पूरे बहस और निर्णय लेने की प्रक्रिया को नयी दिशा देता है।’’
मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि सेवानिवृत्त हो रहे कुछ सदस्यों ने पुराने और नए संसद भवन दोनों में सेवा की।
उन्होंने छह साल के राज्यसभा कार्यकाल को ‘‘जीवन को आकार देने का अमूल्य अवसर’’ बताया और कहा कि इससे सांसदों को राष्ट्रीय मामलों की गहन समझ प्राप्त होती है।