श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट को जाने देना केकेआर का गलत फैसला: अनिल कुंबले

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मुंबई, 14 मार्च (भाषा) महान क्रिकेटर अनिल कुंबले ने कहा कि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने 2024 में खिताब जीतने के बाद श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट को जाने देकर गलत फैसला किया। उन्होंने कहा कि जब तक तीन बार की आईपीएल चैंपियन टीम अहम खिलाड़ियों को अपने पास बनाए रखने की अहमियत नहीं समझेगी तब तक उसे खिताब का गंभीर दावेदार नहीं माना जा सकता।

अय्यर केकेआर छोड़कर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए जिसकी कप्तानी करते हुए उन्होंने पिछले सत्र में करीब एक दशक बाद टीम को पहली बार आईपीएल फाइनल में पहुंचाया।

वहीं 2024 में केकेआर की सफलता का अहम हिस्सा रहे फिल सॉल्ट रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) चले गए जहां उन्होंने पिछले साल फ्रेंचाइजी को पहली बार खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।

कुंबले ने ‘जियो हॉटस्टार’ की एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘दो साल पहले केकेआर ने आईपीएल जीता था और अपनी तीसरी ट्रॉफी उठाई थी। उस जीत के दो अहम खिलाड़ी श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट थे। दोनों ने टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई लेकिन केकेआर ने दोनों को जाने दिया। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ियों को अपने साथ रखने के मामले में उनमें कोई निरंतरता नहीं है। केकेआर ने श्रेयस अय्यर और फिल सॉल्ट को जाने देकर गलत फैसला किया और इस वजह से अब उनके पास आईपीएल जीतने वाला कोई कप्तान नहीं है। ’’

कुंबले ने कहा कि भले ही केकेआर के पास कप्तान के तौर पर अजिंक्य रहाणे जैसा अनुभवी खिलाड़ी है लेकिन उन्होंने अभी तक कप्तान के तौर पर आईपीएल का खिताब नहीं जीता है।

कुंबले ने कहा, ‘‘अजिंक्य रहाणे एक अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मुंबई और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की है। लेकिन उन्होंने अभी तक कप्तान के तौर पर आईपीएल का खिताब नहीं जीता है। ’’

इस दिग्गज स्पिनर ने आगे कहा, ‘‘ऐसा कप्तान होना जिसने ट्रॉफी जीती हो, आपको फायदा देता है। उन्हें यह सीखना होगा कि अपने अहम खिलाड़ियों को अपने पास कैसे बनाए रखा जाए। वर्ना वे संघर्ष करते रहेंगे और उन्हें ट्रॉफी जीतने का दावेदार नहीं माना जा सकता। ’’

भारत के पूर्व कप्तान ने पिछले साल पंजाब किंग्स को आईपीएल फाइनल तक पहुंचाने के लिए अय्यर के नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ की।

उन्होंने कहा, ‘‘श्रेयस अय्यर निश्चित रूप से कप्तान के तौर पर कम आंके गए हैं। एक फ्रेंचाइजी के साथ ट्रॉफी जीतना और फिर दूसरी फ्रेंचाइजी में जाना आसान नहीं होता। वहां का प्रबंधन, माहौल और टीम सब अलग होते हैं। वहां का दबाव भी अलग होता है। ’’

कुंबले ने कहा, ‘‘जिस नयी फ्रेंचाइजी में वह शामिल हुआ था, उसने पिछले 10 साल में फाइनल नहीं खेला था और पंजाब किंग्स के साथ अपने पहले ही सत्र में उसने उन्हें फाइनल तक पहुंचा दिया। मैं न सिर्फ उसकी कप्तानी से प्रभावित हुआ, बल्कि जिस तरह से उसने टीम का नेतृत्व किया, उससे भी प्रभावित हुआ। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्हें हर बार खुद को साबित करना पड़ता है। श्रेयस भी वैसा ही है। अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी, उस पर सवाल उठते रहते हैं। मुझे लगता है कि उसे कम आंका जाता है, लेकिन वह एक असाधारण नेतृत्वकर्ता है। ’’

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