नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने अपने उभरते करियर की आखिरी बाधा पार करते हुए अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर लिया, जिससे वह भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बन गए। वह के पूर्वोत्तर से यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
असम के गुवाहाटी के रहने वाले 17 वर्षीय चक्रवर्ती 2024 में इंटरनेशनल मास्टर बने थे। उन्होंने ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स चेस टैलेंट्स टूर्नामेंट’ के आठवें दौर में एक दौर बाकी रहते ही यह उपलब्धि हासिल कर ली। उन्होंने इस दौर में स्वीडिश आईएम फिलिप लिंडग्रेन को हराया।
लिंडग्रेन पर जीत के दौरान चक्रवर्ती अपने खेल के चरम पर थे। उन्होंने जरूरी 6.5 अंक जुटाए जो उनका अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म पक्का करने के लिए काफी थे।
आखिरी दौर में उन्होंने इंग्लिश इंटरनेशनल मास्टर जोना बी विलो के साथ एक रोमांचक ड्रॉ खेला और इस तरह अपने अब तक के सबसे यादगार प्रदर्शन पर मुहर लगा दी।
इस प्रक्रिया में चक्रवर्ती ने 2500 ईएलको रेटिंग का अहम आंकड़ा भी पार कर लिया। उनकी मौजूदा रेटिंग इस सीमा से कुछ अंक ऊपर है जिससे अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) के नियमों के अनुसार उनका ग्रैंडमास्टर खिताब पक्का हो गया है।
चक्रवर्ती ने इस दौरान एक बाजी गंवाई, दो ड्रॉ खेले और बाकी छह बाजियां जीती। इस तरह उन्होंने कुल नौ में से सात अंक हासिल किए। साथ ही उन्होंने टूर्नामेंट का खिताब भी अपने नाम कर लिया। उन्होंने नॉर्वे के एक्सेल बू क्वालॉय पर आधे अंक की बढ़त बनाई जिन्हें आखिरी दौर में वॉकओवर मिला था।
चक्रवर्ती 2024 में इंटरनेशनल मास्टर बने थे और अपने आयु वर्ग के शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में से एक रहे हैं।
अंडर-11 वर्ग में भारत और एशिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी चक्रवर्ती के लिए 2021 का सत्र बेहद शानदार रहा। उस साल उन्होंने यूरोप में कई टूर्नामेंट खेले जिससे उनकी ईएलओ रेटिंग 1800 से बढ़कर 2200 के करीब पहुंच गई। साथ ही वह 2009 या उसके बाद जन्में खिलाड़ियों की ईएलओ रैंकिंग में दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी बन गए।
उनकी असाधारण प्रतिभा की बदौलत वह अंडर-9 वर्ग में राष्ट्रीय रजत पदक और अंडर-11 वर्ग में राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे।
इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका में आयोजित एशियाई युवा शतंरज चैंपियनशिप में अंडर-10 वर्ग का रजत पदक भी जीता था। उनकी सफलता में उनके परिवार की अहम भूमिका रही है जिसमें उनकी डॉक्टर मां उनके लिए स्तंभ बनीं जबकि उनके पिता ने टूर्नामेंट के दौरान उनके साथ सफर करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।