बेंगलुरु, छह मार्च (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए कई कार्यक्रमों की घोषणा की और कहा कि उनकी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य बेंगलुरु को ‘‘दुनिया का सबसे अच्छा रहने योग्य शहर’’ बनाना है।
उन्होंने 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगम अपनी ‘बैलेंस शीट’ (किसी कंपनी, संगठन या व्यक्ति की वित्तीय स्थिति का सारांश) के आधार पर ‘नगर निगम बांड’ जारी करके विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाएंगे।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘बेंगलुरु महज एक शहर नहीं बल्कि यह अनगिनत सपनों की भूमि है। नादप्रभु केम्पेगौड़ा के प्रशासन से लेकर आज की स्टार्टअप क्रांति तक, इस शहर ने अपनी अनूठी पहचान बरकरार रखी है। हमारी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य बेंगलुरु को दुनिया का सबसे अच्छा रहने योग्य शहर बनाना है।’’
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के पांच नगर निगमों में वार्ड सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास का कार्य कुल 1,255 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पारदर्शी, जनहितैषी, सहभागी और उत्तरदायी शासन प्रदान करने के लिए ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण और पांच निगमों की स्थापना की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने बेंगलुरु के विकास के लिए अनुदान को 3,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अनुदान चालू वर्ष में भी जारी रहेगा।’’
सिद्धरमैया ने कहा कि सड़कों की दीर्घकालिक मजबूती के लिए अगले तीन वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 450 किलोमीटर से अधिक सड़कों की ‘व्हाइट टॉपिंग’ (सड़कों के ऊपर सीमेंट कंक्रीट की नयी परत बिछाना) की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु नगर निगम के आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके अगले तीन वर्षों में 175 चौराहों का सौंदर्यीकरण, 500 किलोमीटर फुटपाथों का उन्नयन और 100 स्काईवॉक का निर्माण करने का प्रस्ताव है।
सिद्धरमैया ने कहा कि भविष्य में विकास और सतत भूमि उपयोग नियोजन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बेंगलुरु के लिए एक नया संशोधित मास्टर प्लान-2041 (आरएमपी) 2027 के अंत तक लागू किया जाएगा। इसके अलावा भविष्य की यातायात जरूरतों, जाम को कम करने और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) छह महीने के भीतर तैयार किया जाएगा।
‘नम्मा मेट्रो’ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है। वर्तमान में इसका परिचालन नेटवर्क 96 किलोमीटर में फैला है जिससे प्रतिदिन 10 लाख यात्रियों को लाभ मिलता है। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक हुए 67,460 करोड़ रुपये के व्यय में से राज्य का हिस्सा 59,376 करोड़ रुपये और केंद्र का हिस्सा 8,084 करोड़ रुपये है। केंद्र का हिस्सा केवल 12 प्रतिशत है, जबकि राज्य का हिस्सा 88 प्रतिशत है।’’