नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में छिड़े सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर जोखिम होने के बावजूद वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल रहने के अनुमान से अधिक बढ़ने की संभावना नहीं है। फिच रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति होने से कीमतों में तेज बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा व्यवधान के अस्थायी ही रहने की संभावना है।
फिच ने कहा कि यह जलडमरूमध्य अभी औपचारिक रूप से बंद नहीं हुआ है, लेकिन ईरान या उससे जुड़े समूहों के संभावित हमलों के जोखिम को देखते हुए कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।
सुरक्षा कारणों से कुछ तेल कंपनियों ने अपनी खेप रोक दी है जबकि बीमा कंपनियां जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा को रद्द कर रही हैं।
एजेंसी ने कहा, “हमने दिसंबर में 2026 के लिए ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया था। हमें अब भी उस अनुमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है।”
हालांकि, ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल के साझा हमलों और ईरान के पलटवार के बीच समूचे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बन गई है।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत जनवरी-फरवरी, 2026 के औसत 66-67 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 82-84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री तेल परिवहन का एक अहम मार्ग है। लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
संघर्ष से पहले प्रतिदिन करीब दो करोड़ बैरल कच्चा तेल एवं पेट्रोलियम उत्पाद इस मार्ग से गुजरते थे, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई और वैश्विक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा है।
हालांकि, एजेंसी ने कहा है कि जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावी रूप से बंद रहता है या क्षेत्र के तेल एवं गैस उत्पादन तथा परिवहन ढांचे को गंभीर नुकसान होता है, तो तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है और कीमतों में अधिक तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।