दुनिया में कई तरह के जीव-जंतु पाए जाते हैं। इन जीव-जंतुओं में कुछ में अलग ही विशेषता होती है जिसके कारण वे अलग पहचान रखते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही जीवों के बारे में।
जेब वाले अनोखे जीव मार्स्युपिअल्स:
जरा जेब की अनोखी खोज के बारे में सोचिए। जेब के भीतर आप सामान रख सकते हैं, पैसे रख सकते हैं, कीमती चीजें रख सकते हैं। मनुष्यों के शरीर में जेब नहीं होती बल्कि वे अपनी पोशाकों में जेब सिलवाते हैं पर जानवरों में कुछ जानवर ऐसे होते हैं जिनके पेट के साथ जेब होती है जिसमें वे अपने बच्चों को साथ लेकर घूमते हैं। इन जंतुओं को ‘मार्स्युपिअल्स‘ कहा जाता है। ये सामान्यतया अमेरिका और आस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं।
मार्स्युपिल्स जीवों में माताएं प्रेरक होती हैं जो अपने बच्चों को अपने शरीर से चिपकी हुई मुलायम जेब में रखती हैं, जैसा संसार के सभी मार्स्युपिअल्स करते हैं। मां के पेट के साथ चिपके हुए ये बच्चे इस अनोखी जेब में स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।
सोने वाला कोआला:
कोआला प्रजाति यूकेलिप्टस के पेड़ों पर रहती है और पेड़ की पत्तियों से भोजन व पानी की कमी पूरी करती है। कोआला प्रजाति दिन में 18 से 22 घंटे सोने में गुजार देती है। ‘कोआला‘ शब्द का अर्थ है ‘वे जीव जो पानी नहीं पीते।‘ कोआला जीव कैद में 20 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं जबकि जंगलों में 10 साल तक। कोआला भालू नहीं होते।
वूंबैट की थैली:
वूंबैट कौआ के नजदीकी रिश्तेदार होते हैं। दोनों की थैली का डिजाइन एक जैसा होता है जो पीछे की ओर खुलता है। वूंबैट प्रायः रात को पुराने बिलों की खुदाई करना पसंद करते हैं। इनमें से कुछ बिल तो एक हजार वर्ष पूर्व कई बार खोदे गए थे। वूंबैट को दांतों के डॉक्टर की कभी जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि बिना जड़ों के उनके दांत पूरे जीवनकाल में निकलते रहते हैं। वूंबैट के सोने का तरीका भी कुछ अजीबोगरीब होता है। पहले वे एक तरफ करवट लेकर सोते हैं लेकिन जैसे ही उनकी नींद गहरी हो जाती है, वे कमर के बल सोते हैं और ऐसा करते समय उनके चारों पैर हवा में होते हैं।
प्राचीन स्तनधारी जीव पोस्सम:
पोस्सम की 60 से अधिक प्रजातियां हैं। यह प्रजातियां पृथ्वी पर तब से हैं, जब पृथ्वी पर डायनासोर रहते थे। यानी 7 से 8 करोड़ वर्ष पहले की यह सबसे प्राचीन स्तनधारी प्रजाति है जो अभी भी जीवित है। यह प्रजाति अमेरिका और आस्ट्रेलिया में पाई जाती है। पोस्सम शब्द अमेरिका की जनजाति ‘अपासम‘ से आया है जिसका अर्थ है सफेद जीव।
भूमिगत बिलों में मार्स्युपिअल्स:
सभी छछूंदरों की तरह मार्स्युपिअल्स छछूंदरों में भी देखने की क्षमता नहीं होती। वे अपने जीवन का अधिकांश समय भूमिगत बिलों में व्यतीत करते हैं। इस प्रजाति के बारे में जानकारी काफी कम है लेकिन यह जानकारी अवश्य है कि इनमें सुनने की क्षमता भी नहीं होती लेकिन कोई यह नहीं जानता कि इनमें ऐसी कौन सी विशेषता होती है कि ये भूमिगत रह पाते हैं। शायद वे सुगंध और स्पर्श की क्षमता पर निर्भर रहते होंगे। जैसे ही वे कोई खतरा भांपते हैं, वे नए ठिकाने की तलाश में आगे बढ़ जाते हैं। छछूंदरों की केवल यही दो प्रजातियां हैं, जो आस्ट्रेलिया की मरूभूमि पर रहती हैं। यह प्रजाति आज संकट में है।
उछलने वाले कंगारू:
कंगारू की 40 से अधिक प्रजातियां आस्ट्रेलिया और न्यू गिनी में पाई जाती हैं। सबसे छोटे कंगारू को वालबीज कहा जाता है और सबसे बड़ा कंगारू रेड कंगारू कहलाता है। इन दोनों के बीच के कंगारू को बलारूज कहा जाता है। सभी कंगारू ऊंची छलांग लगा सकते हैं पर पीछे की ओर छलांग नहीं लगा सकते। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कंगारू पानी में तैर भी सकते हैं, वह भी किनारे से एक मील तक। इसकी दौड़ने की क्षमता 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। नर कंगारू को ‘बूमर‘,स्त्री कंगारू को ‘फ्लायर‘ और बेबी कंगारू को ‘जोई‘ कहा जाता है। समूह में कंगारू को मॉब, ट्रूप या कोर्ट कहा जाता है।
