समय के साथ धूप तेज एवं कम हो जाती है। गर्मी की धूप तेज होती है। वर्षाकाल में धूप कम निकलती है, फिर भी तेज होती है। ठंड की धूप प्यारी होती है। ठंड के समय सूर्योदय से लेकर प्रारंभिक तीन घंटे की धूप सर्वोपयुक्त होती है। इससे बहुत लाभ मिलता है। धूप तेज, हल्की या कोमल हो, कभी भी 15-20 मिनट से ज्यादा धूप में नहीं रहना चाहिए। धूप में इतने समय रहने से पर्याप्त लाभ मिल जाता है। यह विटामिन डी का श्रेष्ठ एवं प्राकृतिक स्रोत है। इससे हड्डियां एवं मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इससे बीपी नियंत्रित होता है एवं पाचन सुधरता है। जोड़ों का दर्द दूर होता है। धूप में बैठने से शुगर लेवल भी नियंत्रित होता है। स्त्री पुरूष दोनों की प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है। पुरूष के शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है जबकि स्त्री की गर्भधारण क्षमता बढ़ जाती है। सूर्य धूप से लाभ पाने की चाह रखने वाले धूप में आंखें बंद रखें। शरीर के प्रत्येक अंग पर धूप का सेंक पड़े, इसका प्रयास करें।