केरल के शिक्षा मंत्री ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक विवाद में न्यायालय के हस्तक्षेप का स्वागत किया

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तिरुवनंतपुरम, 27 फरवरी (भाषा) केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप का शुक्रवार को स्वागत किया और हाल में पाठ्यपुस्तकों में किए गए संशोधनों की व्यापक जांच की मांग की।

शिवनकुट्टी ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में न्यायपालिका की गरिमा को कमतर करने वाले संदर्भों के खिलाफ शीर्ष अदालत के कड़े रुख का स्वागत किया।

मंत्री के अनुसार, विद्यार्थियों को न्यायिक प्रणाली के बारे में भ्रामक संदेश देना एक गंभीर अपराध है और न्यायपालिका का अनादर करने वाली सामग्री को शामिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था।

उन्होंने कहा, ‘‘युवा पीढ़ी को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए।’’

मंत्री ने यह भी मांग की कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पाठ्यपुस्तकों में किए गए सभी हालिया संशोधनों और हटाए गए अंशों की जांच एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या इतिहास और संवैधानिक मूल्यों को विकृत करने के प्रयास किए गए थे।’’

उन्होंने बताया कि केरल ने एनसीईआरटी द्वारा एकतरफा रूप से हटाए गए अंशों का पूर्व में विरोध किया था और एनसीईआरटी द्वारा हटाए गए महत्वपूर्ण अंशों को शामिल करते हुए अतिरिक्त पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित की थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘विवादास्पद सामग्री तैयार करने और उसे मंजूरी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एनसीईआरटी निदेशक और अन्य संबंधित पक्षों को अदालत द्वारा उठाए गए सवालों के स्पष्ट जवाब देने होंगे।’’

उन्होंने कहा कि राज्य का यही मत है कि उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक व्यापक जांच जरूरी है और सांप्रदायिकता या संविधान विरोधी प्रवृत्तियों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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