निकट भविष्य में रेपो दर में बढ़ोतरी की संभावना नगण्य: आरबीआई एमपीसी सदस्य

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मुंबई, 25 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई का दबाव बढ़ने के बावजूद निकट भविष्य में नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में वृद्धि की संभावना ‘‘नगण्य’’ है।

उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी जोखिम, धातुओं की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल के ऊंचे दाम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं।

सौगत भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को ईमेल के जरिये दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘ निकट अवधि में रेपो दर बढ़ाने की जरूरत पड़ने की संभावना मुझे नगण्य दिखती है।’’

भट्टाचार्य और एमपीसी के अन्य पांच सदस्यों ने इस महीने की शुरुआत में हुई बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने के पक्ष में मतदान किया था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने ‘तटस्थ’ नीतिगत रुख को भी बनाए रखा था जिससे संकेत मिलता है कि दरें कुछ समय तक निचले स्तर पर रह सकती हैं।

उन्होंने कहा कि कई प्रोत्साहन उपायों के बावजूद अर्थव्यवस्था में अत्यधिक तेजी के कोई संकेत नहीं हैं।

केंद्रीय बैंक ने फरवरी, 2025 से अब तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, जो 2019 के बाद सबसे आक्रामक नरमी चक्र माना जा रहा है।

महंगाई पर उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है। इसकी एक वजह वित्त वर्ष 2025-26 में कुल (और सब्जियों) मुद्रास्फीति की गिरती कीमत का आधार प्रभाव है, जो अब उलट सकता है। दूसरी वजह कीमती धातुओं की कीमतों का प्रभाव है। हालांकि, इन कारकों को छोड़ दें तो अंतर्निहित महंगाई संतुलित रहने की उम्मीद है।

ऋण वृद्धि पर उन्होंने कहा कि गैर-खुदरा बैंक ऋण में लगातार सुधार हो रहा है और अब बड़े कॉरपोरेट घरानों को भी अधिक कर्ज मिल रहा है। दिसंबर, 2025 में बड़े कॉरपोरेट को ऋण वृद्धि 7.5 प्रतिशत रही, जबकि मध्यम-कॉरपोरेट के लिए यह करीब 20 प्रतिशत थी। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को ऋण 29 प्रतिशत बढ़ा। एनबीएफसी को ऋण भी दिसंबर, 2025 में लगभग तीन गुना बढ़ा।

उन्होंने कहा कि क्षमता उपयोग लगभग 75 प्रतिशत पर है, हालांकि, कुछ क्षेत्रों में यह अधिक है।

वृद्धि पर उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घरेलू खपत से आता है और यही वृद्धि का प्रमुख चालक बना रहेगा, हालांकि टिकाऊ विस्तार के लिए घरेलू एवं बाहरी दोनों मांग जरूरी हैं।

वैश्विक व्यापार पर उन्होंने कहा कि अमेरिका के जवाबी शुल्क संबंधी फैसलों के बाद स्थिति अभी प्रारंभिक चरण में है और प्रतिस्पर्धी देशों के साथ शुल्क प्रतिस्पर्धा का संतुलन बनना बाकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम अमेरिका के साथ शुल्क और व्यापार समझौतों के किसी संतुलन पर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, व्यापार आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय निर्यातक (कुछ क्षेत्रों को छोड़कर) अपने बाजारों में विविधता लेकर आए हैं।’’

आगामी नई जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) श्रृंखला पर उन्होंने कहा कि संशोधित पद्धतियां और अद्यतन सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाएंगे और नीतिगत निर्णयों को अधिक सटीक बनाने में मदद करेंगे।

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