स्वयं की तुलना दूसरों से कभी मत कीजिए। इससे अधिक आवश्यक है अपने को पहले से बेहतर बनाने का प्रयास। स्वयं को दिलचस्प बनाने की कोशिश कीजिए, नये शौक अपनाकर या विविध विषयों की जानकारी रखकर। अनुशासित बनने की कोशिश कीजिए। अपने निजी क्रिया-कलापों, आचार-व्यवहार को अनुशासन की मर्यादा में समाहित करके रखें क्योंकि अनुशासन ही हमें सफलता का पहला अध्याय सिखाता है। अपने निर्णय स्वयं लेने की आदत डालिये। दूसरों की राय के अनुसार निर्णय लेने की बजाय उस विषय से संबंधित अच्छाइयों एवं बुराइयों की विस्तारपूर्वक व्याख्या करके विषय के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने की कोशिश कीजिए। हर हालत में अपने को संतुष्ट रखें। काम बिगड़ने पर भी अपना उत्साह बनाये रखें क्योंकि कोई भी स्थिति अपने आप में सम्पूर्ण नहीं होती। हमेशा कुछ नया सीखने के विषय में सोचिए जैसे कढ़ाई, सिलाई, बुनाई, संगीत नृत्य, पेंटिंग, नए-नए व्यंजन बनाना आदि। कुछ भी नया बनाने से आपको अपनी सफलता का अहसास होगा। खरीदारी करने जाने के पूर्व निर्धारित सामान की एक सूची बना लें और खर्च होने वाली रकम निश्चित कर लें। रकम का कुछ हिस्सा वस्तुओं की खरीदारी में खर्च भी हो जाए तो कोई बात नहीं। किसी समस्या का मुकाबला करने के लिए अपने इर्द-गिर्द जो हो, उसे महसूस कीजिए और उस पर नियंत्राण रखने की कोशिश कीजिए। यद्यपि परिस्थितियों को हमेशा बदला नहीं जा सकता लेकिन अपने दृष्टिकोण को तो बदला जा सकता है। परेशानी एवं चिंता में किए गए कार्य का अच्छा परिणाम नहीं निकलता। सुकून एवं संतुलित तरीके से आप निश्चित ही अपने काम को बेहतर ढंग से अंजाम दे सकती हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय निकालिए। अपने बिजी समय में आप वह करें जो आपकी पसंद हो जैसे टी वी देखें, गाना सुनें, या किताब पढ़ें। अपने बच्चे की दूसरे बच्चों से तुलना करके तनावग्रस्त न रहें। प्रत्येक बच्चे की योग्यता, रूचि और स्वभाव भिन्न होता है। इस बात को स्वीकार करंे। अपनी तारीफों को सहर्ष स्वीकारिए। आत्मविश्वास बढ़ाने का यह एक अत्यंत ही बेहतरीन तरीका है। हर सुबह एक अच्छा मूड लेकर बिस्तर से उठिए। सुबह की चाय बनाते समय या नहाते समय गुनगुनाइए। मूड अच्छा नहीं है तो भी पसंद का गाना सुनिए। अपना मूल्यांकन करते समय यह याद रखिए कि हम सभी गलतियां करते हैं। गलतियों से ही सीखने का मौका मिलता है। कोशिश करें कि वह गलती दोबारा न हो।