नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) में मिलाई जाने वाली बायो-गैस पर प्रस्तावित उत्पाद शुल्क छूट और एक स्पष्ट नीतिगत दिशा से देश में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। इंडियन बायो-गैस एसोसिएशन (आईबीए) ने रविवार को यह बात कही।
आईबीए ने बयान में कहा कि सरकार ने हाल ही में घोषित आम बजट 2026-27 में सीएनजी के साथ मिश्रित संपीडित बायो-गैस (सीबीजी) पर उत्पाद शुल्क में छूट प्रदान की है। यह 2070 तक ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन’ लक्ष्य की ओर भारत के ऊर्जा बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बयान के अनुसार, यदि देश भर में शहरी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क अगले पांच वर्षों में केवल पांच प्रतिशत बायो-गैस मिश्रण का स्तर भी हासिल कर लेते हैं, तो इसके लिए सालाना लगभग 25-30 लाख टन सीबीजी की आवश्यकता होगी।
आईबीए ने कहा, ‘‘इससे ही 45,000 से 55,000 करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है। यदि स्पष्ट नीति और स्थिर कीमतें बनी रहती हैं, तो 2032 तक यह मिश्रण सात-आठ प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में निवेश की संभावना दोगुनी होकर लगभग एक लाख करोड़ रुपये हो जाएगी।
एसोसिएशन के अनुसार, उत्पाद शुल्क में छूट न केवल गैस की कीमतों में कमी लाएगी, बल्कि इससे निजी निवेश में तेजी आएगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। इसके साथ ही जलवायु और ग्रामीण विकास के मोर्चे पर भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।