सूडान की तबाही में ‘नरसंहार के स्पष्ट संकेत’ दिखाई देते हैं: संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ

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जिनेवा, 19 फरवरी (एपी) संयुक्त राष्ट्र समर्थित मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि सूडान के पश्चिमी क्षेत्र दारफुर के एक शहर और उसके आसपास के इलाकों में गैर-अरब समुदायों के खिलाफ सूडानी विद्रोहियों द्वारा अक्टूबर में चलाए गए “अभियान” में “नरसंहार के संकेत” दिखाई देते हैं।

यह देश में जारी विनाशकारी युद्ध को लेकर एक चौंकाने वाला निष्कर्ष है।

सूडान पर एक स्वतंत्र तथ्यान्वेषी मिशन की रिपोर्ट के अनुसार, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) ने अल-फशेर में 18 महीने की घेराबंदी के बाद बड़े पैमाने पर हत्याएं और अन्य अत्याचार किए। इसके अनुसार, इस दौरान रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने गैर-अरब समुदायों, विशेष रूप से जघावा और फुर समुदायों को नुकसान पहुंचाने के लिए सोची-समझी शर्तें लागू कीं।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि दारफुर में सूडानी सेना के एकमात्र बचे गढ़ अल-फशेर पर आरएसएफ के कब्जे के दौरान कई हजार नागरिक मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि शहर के 260,000 निवासियों में से केवल 40 प्रतिशत ही हमले से बचकर निकलने में कामयाब रहे। उनमें से हजारों घायल हो गए। उन्होंने बताया कि बाकी बचे लोगों का क्या हुआ, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है।

सूडान में अप्रैल 2023 के मध्य में उस समय संघर्ष छिड़ गया, जब राजधानी खार्तूम में सैन्य और अर्धसैनिक नेताओं के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव भड़क उठा और दारफुर सहित अन्य क्षेत्रों में फैल गया।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के अनुसार, इस विनाशकारी युद्ध में 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, लेकिन सहायता समूहों का कहना है कि यह आंकड़ा कम है और वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है।

आरएसएफ और उनके सहयोगी अरब मिलिशिया, जिन्हें जंजावीद के नाम से जाना जाता है, ने 26 अक्टूबर को अल-फशेर पर कब्जा कर लिया और शहर में खूब उत्पात मचाया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इस हमले में व्यापक अत्याचार हुए, जिनमें सामूहिक हत्याएं, फांसी, यौन हिंसा, यातनाएं और फिरौती के लिए अपहरण शामिल थे।

कार्यालय ने बताया कि उन्होंने 25 अक्टूबर से 27 अक्टूबर के बीच शहर में 6,000 से अधिक लोगों की हत्या कर दी। उसने बताया कि हमले से पहले, विद्रोहियों ने शहर के ठीक बाहर स्थित अबू शौक विस्थापन शिविर में जमकर उत्पात मचाया और दो दिनों में कम से कम 300 लोगों को मार डाला।

आरएसएफ को एक ईमेल भेजकर टिप्पणी का अनुरोध किया गया लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। समूह के कमांडर, जनरल मोहम्मद हमदान डगालो ने अपने लड़ाकों द्वारा किए गए दुर्व्यवहारों को पहले स्वीकार किया था।

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