नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य गौरव वल्लभ ने मंगलवार को कहा कि भारत को नई प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत है और बंदरगाहों पर माल ढुलाई प्रबंधन के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) प्रौद्योगिकी का उपयोग करके 20,000 करोड़ रुपये तक की बचत की जा सकती है।
‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में ‘एआई-पावर्ड पोर्ट्स: रीइमेजिनिंग एफिशिएंसी एंड ऑपरेशंस’ सत्र में वल्लभ ने कहा कि भारत नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक वैश्विक अगुवा के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संचालन में एआई के उपयोग से लगभग 20,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.. और जहां तक लॉजिस्टिक लागत का सवाल है, हम हर साल 15,000 करोड़ रुपये बचा सकते हैं।’’
वल्लभ ने कहा, ‘‘सवाल यह नहीं है कि क्या एआई भारत के बंदरगाहों को बदल देगा, सवाल यह है कि हम इसका नेतृत्व करने जा रहे हैं या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद का 7.97 प्रतिशत है जो प्रतिस्पर्धी है, लेकिन विकासशील भारत के 2047 के लक्ष्य के लिए, हमारे बंदरगाहों का पारिस्थितिकी तंत्र प्रौद्योगिकी आधारित होना चाहिए।”