न्यायालय की संविधान पीठ 17 मार्च को करेगी ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा पर सुनवाई

0
supreme_court_pti_final_1572977047_1625738823

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि नौ-सदस्यीय संविधान पीठ औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा से संबंधित मुद्दे पर 17 मार्च से सुनवाई शुरू करेगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने विचारणीय प्रश्न तैयार किए।

उच्चतम न्यायालय ने संबद्ध पक्षों को 28 फरवरी 2026 या उससे पहले अपने लिखित अभ्यावेदन को अद्यतन करने या अतिरिक्त नये लिखित अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई 17 और 18 मार्च को होगी।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी सुविचारित राय में, हमें निम्नलिखित मुद्दों का निर्णय करना है: यह निर्धारित करने के लिए कि कोई उद्यम ‘उद्योग’ की परिभाषा में आता है, क्या बेंगलुरु जलापूर्ति मामले में न्यायमूर्ति वी. कृष्ण अय्यर द्वारा पैरा 140 से 144 में निर्धारित परीक्षण को वैध माना जाए?’’

पीठ का अगला सवाल है, ‘‘क्या औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1982 प्रभावी रूप से लागू नहीं हुआ था और क्या उद्योग संहिता ने ‘उद्योग’ शब्द पर कोई कानूनी प्रभाव डाला?’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस बात पर भी विचार करेगा कि क्या सरकारी विभागों या संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों या योजनाओं को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत औद्योगिक गतिविधियां माना जा सकता है।

वर्ष 2017 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि इस मुद्दे के ‘‘गंभीर और व्यापक प्रभावों’’ को ध्यान में रखते हुए उसके समक्ष दायर अपीलों को नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए।

मई 2005 में, सर्वोच्च न्यायालय की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(जे) में ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा की व्याख्या के संबंध में मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।

पीठ ने कहा था कि वृहद पीठ को सभी कानूनी प्रश्नों की पड़ताल सभी दृष्टिकोणों और गहराई से करनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *