पत्नी को गुस्सा क्यों आता है

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हर पत्नी चाहती है कि उसका पति अधिक से अधिक समय उसके साथ रहे, उसको भरपूर प्यार करे तथा उसका हर तरह से ख्याल रखे लेकिन जब पति घर से सवेरे निकलकर देर रात को घर लौटता है और मारे थकान के पत्नी का हाल चाल जाने बिना ही सो जाता है तो पत्नी का गुस्सा होना स्वाभाविक है।
सुनीता की अपने पति से रोज नोक-झोंक होती रहती है। नोक-झोंक का कारण कोई और नहीं, सिर्फ पति द्वारा पत्नी को समय न देना है। सुनीता चाहती है कि उसका पति जितना संभव हो सके, उसके साथ समय बिताए, दोनों समय-समय पर कहीं घूमने जाएं तथा मायके जाने की भी उसे खुली छूट मिले।
दूसरी ओर पति बेचारा विवश है। उसे रोजी-रोटी के कार्य से बाहर जाना पड़ता है और चाह कर भी वह अपनी पत्नी को उतना समय नहीं दे पाता जितना वह चाहती है। घर में बूढ़े मां-बाप व बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के कारण वह अपनी पत्नी को मायके में थोड़े दिन रहने के लिए भी नहीं छोड़ पाता। बस इसी कारण सुनीता अपने पति से नाराज रहती है और इस नाराजगी के कारण चिड़चिड़ा स्वभाव बनाकर बात-बात पर गुस्सा होने लगती है जिससे घर की शांति भंग हो गई है।
यही हाल पूनम का भी है। वह चाहती है कि उसका पति उसे अपने मां-बाप के साथ गांव में न रखे बल्कि शहर में ले जाकर रखे ताकि वह खुली शहरी हवा (आधुनिकता) में सांस ले सके क्योंकि गांव में रहने पर उसे सास-ससुर की सेवा तो करनी पड़ती ही है, ऊपर से गांव के रीति-रिवाज मानकर घूंघट में भी रहना पड़ता है लेकिन उसका पति रमेश मजबूर है क्योंकि गांव में खेती-बाड़ी उसे ही संभालनी पड़ती है। और फिर शहर जाकर करे भी क्या? कोई नौकरी होती तो इसी बहाने पत्नी को लेकर शहर चला जाता लेकिन खेती की आमदनी से शहर में रहना अक्लमंदी नहीं है। इसी कारण रमेश ने अपनी पत्नी की बात नहीं मानी। परिणाम स्वरूप पूनम अपने पति से गुस्सा रहने लगी।
ये समस्याएं सिर्फ सुनीता या पूनम के परिवारों में ही नहीं, बल्कि अनेक उन परिवारों में हैं जहां पति व पत्नी दोनों अपनी-अपनी मर्जी का जीवन जीना चाहते हैं जबकि जरूरी यह है कि दोनों एक दूसरे की इच्छा, आवश्यकता, सुविधा का ख्याल करके एक-दूसरे के साथ परिस्थितियों के अनुरूप सामंजस्य बिठाएं।
यदि पत्नी की बात उचित है कि उसका पति बेवजह देर से घर लौटता है और जानबूझकर परिवार से दूर रहने की कोशिश करता है तो ऐसे में पति को पत्नी व परिवार की खातिर अपनी दिनचर्या व कार्यव्यवहार तथा आचरण में पत्नी की इच्छा के अनुरूप परिवर्तन कर लेना चाहिए किंतु यदि पति की मजबूरी है अधिकांश समय आवश्यक कार्यो से बाहर रहना और पत्नी को कम समय दे पाना तो पत्नी को भी पति के साथ एडजस्ट कर लेना चाहिए। यूं बात-बात पर गुस्सा होना किसी समस्या का हल नहीं है।

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