एआई की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए ठोस प्रतिबद्धता जरूरी: नागेश्वरन

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नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) को अपनाने के लिए प्रौद्योगिकी को व्यापक रोजगार क्षमता के साथ जोड़ने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जरूरी है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ 2026 को ऑनलाइन संबोधित करते हुए में नागेश्वरन ने कहा कि देशों को बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने, उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकसित करने, श्रम-प्रधान सेवा क्षेत्रों का विस्तार करने और नियामकीय अड़चनों को दूर करने जैसे निर्णायक कदम उठाने होंगे।

उन्होंने कहा कि एआई को अपनाने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण जरूरी है और यह ‘टीम इंडिया’ का प्रयास होना चाहिए जिसमें निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों व नीति-निर्माताओं की समान भागीदारी हो।

उन्होंने कहा, ‘‘ अभी अवसरों की खिड़की खुली है लेकिन यह अनिश्चित काल तक नहीं रहेगी। हमें अभी कदम उठाने होंगे।’’

सीईए ने एआई अपनाने में तात्कालिकता की जरूरत पर जोर दिया।

नागेश्वरन ने कहा, ‘‘ भारत के लिए यह काम के भविष्य पर बहस नहीं है बल्कि वृद्धि एवं सामाजिक स्थिरता के भविष्य का फैसला है।’’

उन्होंने कहा कि दूरदर्शिता, संस्थागत अनुशासन और निरंतर क्रियान्वयन के साथ भारत मानव संसाधन की वास्तविक प्रचुरता दिखाने वाला पहला बड़ा समाज बन सकता है।

नागेश्वरन ने कहा कि हर साल लाखों नौकरियां उत्पन्न हो रही हैं, लेकिन कौशल का बड़ा अंतर बना हुआ है और कार्यबल का केवल छोटा हिस्सा ही औपचारिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर पाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अंतर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह एक संरचनात्मक कमजोरी है।’’

इस कमजोरी से निपटने के लिए उन्होंने नीतियों में निर्णायक बदलाव का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह अपने-आप नहीं होगा। इसके लिए तात्कालिकता चाहिए, राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए, सरकार की क्षमता चाहिए और प्रौद्योगिकी को व्यापक रोजगार क्षमता के साथ अपनाने की प्रतिबद्धता चाहिए।’’

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