बर्मन परिवार समर्थित रेलिगेयर एंटरप्राइजेज वित्तीय सेवा, बीमा कारोबार को अलग करेगी

0
sdfrt5resa

नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) बर्मन परिवार समर्थित रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) ने अपने वित्तीय सेवा और बीमा कारोबार को दो अलग-अलग सूचीबद्ध इकाइयों में विभाजित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने यह कदम शेयरधारकों के लिए परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ाने और अपनी भावी व्यावसायिक कार्ययोजना को और अधिक स्पष्ट एवं केंद्रित करने के उद्देश्य से उठाया है।

वित्तीय सेवा कंपनी ने बयान में कहा कि फरवरी, 2025 में बर्मन परिवार द्वारा रेलिगेयर का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद से यह कंपनी द्वारा घोषित पहला बड़ा पुनर्गठन है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पास ‘केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड’ में अपनी हिस्सेदारी बनी रहेगी, जो मुख्य रूप से बीमा क्षेत्र पर केंद्रित इकाई के रूप में काम करेगी।

वहीं, कर्ज देने, ब्रोकिंग, निवेश गतिविधियों और संबंधित सेवाओं से जुड़े वित्तीय सेवा कारोबार को ‘रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड’ (आरएफएल) को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

बयान के अनुसार, ‘‘विभाजन के बाद आरएफएल, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के शेयरधारकों को 1:1 के अनुपात में पूर्ण चुकता इक्विटी शेयर जारी करेगी। विभाजन के बाद, आरएफएल को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किया जाएगा, जहां इसकी शेयरधारिता का ढांचा रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के समान ही होगा।”

कंपनी ने कहा कि इस पुनर्गठन का उद्देश्य दो स्वतंत्र इकाइयां बनाकर परिचालन को सुव्यवस्थित करना है, जिससे प्रत्येक व्यवसाय अपने क्षेत्र के अनुसार विकास की रणनीतियों पर काम कर सके। इस प्रक्रिया को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास दायर किया जाएगा और यह शेयरधारकों, लेनदारों तथा नियामक प्राधिकरणों की मंजूरी के अधीन है।

समूह का लक्ष्य इस प्रक्रिया को पूरा कर वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही तक आरएफएल को सूचीबद्ध करना है। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि इस बदलाव के दौरान व्यवसाय संचालन, कर्मचारियों या ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रतुल गुप्ता ने कहा, ‘‘इस लेनदेन से निवेशकों का आधार व्यापक होने, जटिलता कम होने और दो अच्छी तरह से पूंजीकृत मंच तैयार होने की उम्मीद है, जो स्वतंत्र रूप से अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार होंगे।”

उन्होंने कहा कि इस बदलाव से दोनों इकाइयां अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी बनकर उभरेंगी। साथ ही, दोनों के पास भविष्य में विकास के अवसरों का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन होंगे और वे अपनी विशिष्ट व्यावसायिक रणनीतियों पर पूरी एकाग्रता के साथ ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *