शंकराचार्य वह होता है जो सनातन धर्म के लिए काम करता है : अविमुक्तेश्वरानंद
Focus News 14 February 2026 0
वाराणसी, 14 फरवरी (भाषा) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को कहा कि सनातन धर्म में, शंकराचार्य उस व्यक्ति को माना जाता है जो धर्म के लिए काम करता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में संवाददाताओं से कहा, “जो कोई भी उनका (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) समर्थन करता है, वह शंकराचार्य है। जो कोई भी सनातन धर्म के बारे में बात करता है, वह शंकराचार्य बिल्कुल नहीं है। जो परिभाषा उन्होंने (आदित्यनाथ) बनाई है, वह आज से पहले कभी नहीं थी।”
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “सनातन धर्म में, शंकराचार्य उस व्यक्ति को माना जाता है जो सनातन धर्म के लिए काम करता है। सनातन धर्म का पहला विशेषण सत्य है। जो सच बोलता है, गायों की रक्षा करता है और सनातन धर्म की रक्षा करता है।”
योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में एक बयान में कहा था कि हर कोई ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का इस्तेमाल नहीं कर सकता। योगी ने इस बात पर भी बल दिया कि सभी कार्यक्रमों के दौरान धार्मिक मर्यादा और कानून का शासन बनाए रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पिछले महीने प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा रोके जाने से जुड़े विवाद पर पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए शुक्रवार को कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
उन्होंने इस मामले पर समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना ने वर्ष 2015 में सपा के शासनकाल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर वाराणसी में हुए लाठीचार्ज व मुकदमे की याद दिलायी और कहा कि कानून की नजर में सब बराबर हैं।
योगी ने कहा कि वह कानून का पालन करना जानते हैं और पालन कराना भी जानते हैं।
आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए शुक्रवार को कहा, “मैं कहता हूं कि क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूम सकता है… मंत्री बनकर घूम सकता है…समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूम सकता है? इसके लिये एक व्यवस्था है। भारत के सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं।”
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित पद माना जाता है, हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।
मुख्यंत्री ने वर्ष 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में अविमुक्तेश्वरानंद पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा, “अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने वाराणसी में उनपर लाठीचार्ज क्यों किया था? मुकदमा क्यों दर्ज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं?”
योगी ने कहा, “सपा को उन्हें पूजना है तो पूजे, लेकिन हम मर्यादा में रहते हैं। कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून का पालन करना भी जानते हैं, करवाना भी जानते हैं।”
पुलिस ने मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तट पर जाने से रोक दिया था।
इसके बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प व धक्का-मुक्की हुई थी।
अंत में अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान करने से मना कर दिया था।
