तृणमूल सदस्य ने राज्यसभा में श्रमिकों के लिए कानूनी रूप से लागू होने वाले न्यूनतम वेतन की मांग की

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नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने शुक्रवार को राज्यसभा में सरकार से श्रमिकों के लिए कानूनी रूप से लागू किया जा सकने वाला, सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग की।

तृणमूल सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि हर तीन में से एक युवा के पास रोजगार नहीं है, और जिनके पास नौकरी है, उनको भी न्यूनतम वेतन नहीं प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वेतन प्रवाह (नेश्नल वेज फ्लो) लगभग 176 रुपये प्रतिदिन पर स्थिर है।

डेरेक ने कहा कि कम वेतन उपभोग को कम करता है चाहे खर्च कितना भी जरूरी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि कम वेतन श्रमिकों को गरीबी ही देता है।

उन्होंने कहा, “यह देखते हुए, मैं एक ऐसा समाधान सुझा रहा हूँ कि कानूनी रूप से लागू हो सकने वाला, एकल, सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन प्रवाह होना चाहिए, जिससे नीचे किसी भी श्रमिक को भुगतान नहीं किया जा सकता, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, किसी भी प्रकार के अनुबंध के तहत हो, और चाहे वह कहीं भी काम करे।”

तृणमूल सदस्य ने इस योजना के लिए एक नाम ‘सार्वभौमिक, न्यूनतम, वार्षिक राष्ट्रीय गारंटी’ यानी ‘उमंग’ (यूएमएएनजी) नाम भी सुझाया।

डेरेक ने कहा कि ‘उमंग’ लागू करने पर कुछ बिंदुओं का ध्यान रखा जाना चाहिए जैसे श्रम कानून के तहत बाध्यकारी राष्ट्रीय वेतन प्रवाह की अधिसूचना जारी करना, इसे मुद्रास्फीति के अनुसार अनुक्रमित करना और आसानी से पालन के लिए श्रेणियों और दरों को सरल बनाना आदि।

उन्होंने जोर दे कर कहा, “यह सभी क्षेत्रों के श्रमिकों तक जाना चाहिए – अनुबंध वाले श्रमिक, गिग श्रमिक, और सबसे महत्वपूर्ण, जहां कार्रवाई या समाधान की जरूरत है, यानी असंगठित क्षेत्र। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की परेशानियों का कहीं कोई समाधान नहीं है।”

शून्यकाल में ही भारतीय जनता पार्टी की सदस्य रेखा शर्मा ने सांविधिक आयोगों की कार्यप्रणाली पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ये आयोग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में, उनकी समस्याओं के समाधान में, सरकार को विभिन्न मुद्दों के समाधान में और नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मनोनीत सदस्य मीनाक्षी जैन ने संरक्षित धरोहर स्थलों पर तोड़फोड़ के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम्पी जैसे संरक्षित स्थल इतिहास के कई पन्ने खोलते हैं और अगर इनसे छेड़छाड़ की जाए तो इनका वह स्वरूप नष्ट हो जाएगा जिस स्वरूप में ये हमें मिले थे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमज़ान ने हानिकारक कृषि रसायनों और सेब के आयात के कारण कश्मीर के बागवानी उद्योग पर खतरे की बात उठाई। उन्होंने कहा कि कश्मीरी सेब की बात ही कुछ और होती है लेकिन अगर सेब का आयात इसी तरह जारी रहा तो कश्मीरी सेब खतरे में पड़ जाएगा।

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