रायबरेली स्थित एम्स राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हो रहा : प्रमोद तिवारी

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में स्थापित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में अब तक पर्याप्त संसाधन नहीं होने का दावा करते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने सोमवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि यह संस्थान राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हो रहा है क्योंकि इसकी आधारशिला कांग्रेस नेता और रायबरेली की तब की सांसद सोनिया गांधी ने रखी थी।

तिवारी ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में मौजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आठ अक्टूबर 2013 को संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में इस गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एम्स की आधारशिला रखी थी। तब वह रायबरेली संसदीय सीट से सांसद थीं और ‘‘मैं दो बार आपसे (नड्डा से) इस संस्थान में संसाधनों के अभाव को लेकर मिल भी चुका हूं।’’

तिवारी ने कहा ‘‘आज बारह साल से अधिक समय बीत गया है। लेकिन एम्स पूरी क्षमता से आम जन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। यह स्थिति तब है जब यह संस्थान उत्तर प्रदेश के मध्यांचल क्षेत्र के साथ साथ बिहार और मध्य प्रदेश की बड़ी आबादी के लिए जीवन रक्षक एवं उन्नत चिकित्सा सेवाओं का केंद्र बनने की क्षमता रखता है।’’

तिवारी ने दावा किया कि इस संस्थान में शुरू में 960 बिस्तरों का प्रावधान था लेकिन फिलहाल 610 बिस्तर हैं। उन्होंने कहा कि इस एम्स में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के 200 पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 37 पदों पर भर्ती की गई है और प्राध्यापकों के स्वीकृत 33 पदों पर केवल सात की नियुक्तियां की गई हैं।

उन्होंने कहा ‘‘राजनीतिक विद्वेष की भावना से काम करने का इससे दुखद उदाहरण और दूसरा नहीं हो सकता।’’

उन्होंने कहा कि देश में इसके बाद बने एम्स में पूरी सुविधाएं दी गईं। ‘‘लेकिन इसमें ऐसा नहीं है। इसमें 1626 मेडिकल एवं नॉन मेडिकल स्टाफ में से केवल 400 नियुक्तयां की गईं। 1200 कर्मचारियों के बजाय 174 नियुक्तियां की गईं। इतना ही नहीं, 2026-27 के बजट में इस संस्थान के लिए कोई धन नहीं रखा गया।

तिवारी ने कहा ‘‘कम से कम अस्पताल, चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। केवल इसलिए कि विपक्षी दल कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी ने यह अच्छा कदम उठाया, इस संस्थान को आवश्यक संसाधन ही नहीं दिए जा रहे हैं। यह राजनीतिक प्रतिशोध के कारण हो रहा है।’’

जब तिवारी सदन में इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख रहे थे तब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी भी मौजूद थीं।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि आज देश के अन्य हिस्सों में भी एम्स बन गए हैं और काम कर रहे हैं लेकिन दिल्ली स्थित एम्स में मरीजों का दबाव कम नहीं हो पाया है।

उन्होंने कहा ‘‘मैंने स्वयं यह महसूस किया है कि दिल्ली के एम्स की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि वहां मरीजों की संख्या अधिक होती है। मरीजों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहां कई मरीजों को देर से तारीख मिलती है। लेकिन उनके पास विकल्प नहीं होता क्योंकि एम्स मरीजों के लिए आखिरी आशा है।’’

राजद सदस्य ने कहा ‘‘देश के अन्य एम्स में भी दिल्ली एम्स की तरह प्रतिबद्धता होनी चाहिए जबकि ऐसा फिलहाल नजर नहीं आता। ’’

मरीजों के तीमारदारों की समस्याओं का जिक्र करते हुए झा ने कहा कि उनके लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि ये लोग दूर से अपने परिजन को ठीक होने की उम्मीद लेकर एम्स आते हैं, इसलिए इनके तत्काल लौटने की संभावना नहीं रहती।

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