उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी आयोग को शिमला से स्थानांतरित करने के निर्णय को ठहराया सही

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को सोमवार को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार के ओबीसी आयोग के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के निर्णय पर रोक लगाई गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि ऐसे मुद्दे नीतिगत निर्णयों से संबंधित हैं तथा आमतौर पर न्यायिक क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आते हैं।

हालांकि, पीठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के जवाब पर ध्यान देने के बाद राज्य ओबीसी आयोग के कार्यालय के स्थानांतरण के खिलाफ याचिका पर निर्णय लेने को कहा।

पीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।

पीठ ने कहा कि उसकी टिप्पणियां मुख्य रूप से अंतरिम आदेश से जुड़ी हैं और मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।

शुरुआत में पीठ ने कहा कि आम तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आबादी कांगड़ा और आसपास के अन्य इलाकों में रहती है तथा ऐसे निर्णय आमतौर पर ‘जनहित’ में लिए जाते हैं और वे आमतौर पर अदालत का विषय नहीं होते हैं।

इससे पहले उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के फैसले पर नौ जनवरी को रोक लगा दी थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में गहन न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता है।

मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति अंकित की खंडपीठ ने रामलाल शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश सुनाया था, जिसमें राज्य के सात जनवरी के निर्णय को चुनौती दी गई थी।

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