श्री विजय पुरम, आठ फरवरी (भाषा) अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह प्रशासन ने पारंपरिक ‘फाग’ संगीत का लुत्फ उठाने के लिए एक उत्सव का आयोजन किया है।
द्वीपसमूह के कलाकारों ने लोक संगीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें रामायण, महाभारत और कृष्ण लीला की कथाओं का वर्णन किया गया।
शनिवार शाम आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन निदेशक विनायक चमाडिया ने कहा, ‘‘अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ‘मिनी इंडिया’ की तरह है, जहां आपको विविध संस्कृतियां और परंपराएं देखने को मिलती हैं। प्रशासन का उद्देश्य ऐसी सभी परंपराओं की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना तथा उनके विकास के लिए मंच प्रदान करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य द्वीपों की मूल फाग परंपराओं और गीतों को पहचान देना भी है, जो स्वतंत्रता-पूर्व काल से चली आ रही हैं।’’
बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक इस जीवंत लोक संगीत परंपरा का अनुभव करने पहुंचे।
समारोह के सह-आयोजक ‘कालापानी फाग मंडली’ के महासचिव रोहित मोहन लाल ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य एक दुर्लभ लोक परंपरा को पुनर्जीवित करना और संरक्षित करना है, जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। साथ ही निवासियों और पर्यटकों को द्वीप की जीवंत सांस्कृतिक विरासत की प्रामाणिक झलक प्रदान करना भी है।’’
लाल ने बताया कि फाग लोक गीतों का एक पारंपरिक रूप है, जिसे वर्ष 1900 से पहले अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लाया गया था। यह वसंत पंचमी से होली तक के उत्सव काल से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने 80 वर्षीय रतन बिहारी लाल का भी धन्यवाद किया, जो एक वरिष्ठ फाग गायक हैं और कई वर्षों से युवाओं को यह पारंपरिक संगीत शैली सिखा रहे हैं।