सिगरेट पर ऊंचे कर से बढ़ेगा अवैध कारोबार, राजस्व होगा प्रभावित: रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) इस महीने की शुरुआत से लागू हुए अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के कारण सिगरेट की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से इसके अवैध व्यापार में उछाल आ सकता है और कर संग्रह पर दबाव पड़ सकता है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह आशंका जताई गई।

‘सिगरेट पर नया कर शासन और उसका प्रभाव’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि संपूर्ण सिगरेट मूल्य श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर उच्च कर दरों का प्रभाव काफी गहरा होगा, जिसे बाद में बदलना मुश्किल हो सकता है।

अर्था आर्बिट्रेज कंसल्टिंग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “सिगरेट कर दरों में मौजूदा वृद्धि से न केवल अवैध सिगरेट व्यापार और खपत को बढ़ावा मिलने की संभावना है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी होंगे।”

एक फरवरी से पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर के साथ-साथ सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत की उच्चतम जीएसटी दर के ऊपर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू हो गया है। रविवार से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होने के बाद 10 स्टिक वाले सिगरेट के एक पैक की कीमतों में न्यूनतम 22 से 25 रुपये की वृद्धि हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, बढ़ती कीमतों से अवैध तंबाकू उत्पादों की मांग लगभग 39 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सिगरेट की कुल अवैध खपत 46 अरब स्टिक से अधिक हो सकती है।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (एफएआईएफए) के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इससे वैध तंबाकू उत्पादकों और पूरे उद्योग को भारी नुकसान होगा।

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