डेविस कप: बेंगलुरु के ऊंचाई पर स्थित स्थल से सामंजस्य बैठाना होगा भारत-नीदरलैंड को

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बेंगलुरु, चार फरवरी (भाषा) भारत और नीदरलैंड जब इस सप्ताहांत बेंगलुरु में डेविस कप मुकाबले के लिए कोर्ट पर उतरेंगे तो वे सिर्फ एक-दूसरे से मुकाबला नहीं करेंगे बल्कि टेनिस की सबसे मुश्किल परिस्थितियों में से एक ‘ऊंचाई’ का भी सामना करेंगे।

समुद्र तल से 900 मीटर (2,950 फीट) की ऊंचाई पर बेंगलुरु भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित टेनिस आयोजन स्थल है जो पुणे (550 मीटर) से काफी अधिक ऊंचाई पर स्थित है। हालांकि यह क्विटो (2850 मीटर) या ला पाज (3500 मीटर) जैसे स्थलों जितना मुश्किल नहीं है लेकिन इतनी ऊंचाई पर भी हवा गेंद, शरीर और खिलाड़ियों के अंक बनाने के तरीके पर काफी असर डाल सकती है।

डेविस कप जैसी टीम प्रतियोगिताओं में गलती की गुंजाइश काफी कम होती है और ऐसे में परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाना काफी महत्वपूर्ण होगा।

ज्यादा ऊंचाई पर हवा का सीधा असर गेंद की स्पीड पर होता है – शॉट तेजी से जाते हैं और गेंद अधिक उछलती है। समुद्र तल के स्तर पर जो रैली नियंत्रण में लगती है ,वह बेंगलुरु में अचानक लंबी जा सकती है।

खिलाड़ियों को सबसे पहले जो बदलाव करना होता है वह है रैकेट की तारों में। अधिक ऊंचाई पर गेंद तेज जाती है इसलिए खिलाड़ियों को आमतौर पर अपने रैकेट के तारों को सामान्य से अधिक कड़ा रखना पड़ता है।

ढीली तारें ‘ट्रैम्पोलिन’ प्रभाव को बढ़ा देती हैं जिससे नियंत्रण कम हो जाता है और गेंद को अधिक जोर से मारने का जोखिम बढ़ जाता है।

अधिक ऊंचाई पर खिलाड़ियों के लिए कुछ शॉट खेलना मुश्किल हो जाता है जबकि कई शॉट खेलना आसान हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों को दमदार सर्विस करने वाले या फिर बेसलाइन पर ठोस रिटर्न करने वाले खिलाड़ियों को फायदा होता है।

गेंद के अलावा शरीर पर भी ऊंचाई का असर होता है। हवा में ऑक्सीजन कम होने से खिलाड़ी उम्मीद से अधिक जल्दी थक सकते हैं, विशेषकर लंबी रैलियों या लंबे मुकाबलों के दौरान। ऐसी स्थिति में अंकों और गेम के बीच की उबरने की प्रक्रिया अधिक मुश्किल हो जाती है।

ऐसे में परिस्थितियों के अनुसार ढलना बहुत जरूरी हो जाता है। जो टीम जल्दी आती हैं और आयोजन स्थल पर कई दिन अभ्यास करती हैं उन्हें साफ तौर पर फायदा होता है। ये सत्र सिर्फ गेंद को हिट करने के बारे में नहीं होते बल्कि ये खिलाड़ियों को सांस लेने के तरीके, तेजी और शारीरिक रूप से उबरने की प्रक्रिया में बदलाव में भी मदद करते हैं।

ऊंचाई इस चीज में बदलाव नहीं करती कि बेहतर टेनिस खिलाड़ी कौन हैं लेकिन जो जितनी जल्दी सामंजस्य बैठाता है वह उतनी अच्छी स्थिति में होता है। बेंगलुरु में तैयारी, धैर्य और सटीकता उतनी ही मायने रखेगी जितनी प्रतिभा रखती है।

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