सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार बनाएगी ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ समिति

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नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) सरकार ने रविवार को सेवा क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करने और जरूरी उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति – ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ गठित करने की घोषणा की।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत को सेवाओं के मामले में वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी देश बनाना है, ताकि 2047 तक वैश्विक हिस्सेदारी में भारत का योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंच सके।

उन्होंने बताया कि यह समिति विकास, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी। साथ ही, यह नौकरियों और कौशल आवश्यकताओं पर एआई (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का आकलन करेगी और आवश्यक कदम सुझाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘मैं विकसित भारत के मुख्य चालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति – ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ गठित करने का प्रस्ताव करती हूं।’’

यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कुल निर्यात और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान सेवा निर्यात का अनुमानित मूल्य 303.97 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 285.53 अरब डॉलर से अधिक है।

यह समिति विकास, रोजगार और निर्यात की संभावना वाले सेवा उप-क्षेत्रों की पहचान करेगी। इसके अलावा इसे विशिष्ट क्षेत्रों की कमियों को दूर करने और रोजगार क्षमता को बढ़ाने पर भी सिफारिश करनी होगी।

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