आज मनोचिकित्सा (जिसके अन्तर्गत चिकित्सक एवं रोगी में आपने-सामने बैठकर समस्याओं पर विचार होता है ) दिनों-दिन प्रसिद्धि पाती जा रही हैं। मनोचिकित्सक, इस विधि के अन्तर्गत रोगी के साथ अत्यंत हमदर्दी एवं सहृदयता के साथ व्यवहार करता है तथा समस्याओं पर काबू पाने के लिए अत्यन्त सुगम एवं सुरीला रास्ता बताता है।
भावनाओं के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए मनोचिकित्सा एक अत्यंत सुरक्षित एवं मान्यता प्राप्त साधन है जिससे हम अपनी जिंदगी को अत्यंत आसान एवं प्रसन्न बना सकते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोग वही बातें करते हैं जिसे वह अनुभव करते हैं बजाय अपने हाव-भावों के अनुसार।
इसके अलावा व्यक्ति का आचरण भी उसकी भावना के अनुसार हो जाता है। इस तरह की प्रक्रिया में वास्तविकता एवं बुद्धिमता मनोचिकित्सक से रोगी में स्थानांतरित हो जाती है, ऐसा प्रायः देखने में आया है, अर्थात रोगी अपने-आपको एक सामान्य एवं स्वस्थ व्यक्ति के रूप में अनुभव करने लगता है।
मनोचिकित्सक का सीधा स्वभाव विचलित रोगी को प्रसन्नता का अनुभव कराता है लेकिन कभी स्वयं चिकित्सक को तीव्र हाव-भाव भी दिखाने पड़ सकते हैं अगर मामला उल्टा हो अर्थात रोगी असामान्य रूप से सीधे स्वभाव का होता है जिसे अपने कार्यकलापों के खतरे का अनुभव नहीं होता है लेकिन एक मनोचिकित्सक इस प्रकार की स्थिति को दूर करने में समर्थ हो जाता है क्योंकि वे आपस में विरोधी मान्यताओं को समझते हैं तथा उन्हीं मान्यताओं का प्रयोग करते हैं जो वास्तव में कारगर सिद्व हैं।
एक अच्छा मनोचिकित्सक वह है जो लोगों की समस्याओं को समझ कर उनके दुख को दूर करता है। इसके अलावा एक अच्छा मनोचिकित्सक रोगी की हिचकिचाहट को दूर कर उसे वह सब कुछ करने को प्रेरित करता है जिसे वह कर पाने में असमर्थ पाता है। इसके रोगी को किन-किन परिस्थितियों से उबारने की जरूरत है।
स्वाभाविक रूप से हमें उस मनोचिकित्सक की जरूरत नहीं है जो हमारी हर बात से सहमत हो। एक ऐसा मनोचिकित्सक चुनें जो व्यक्ति को उसके जीवन में अधिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए प्रेरित करे। ऐसा चिकित्सक जो हमारे हावभावों, विचारों एवं बुद्धि के साथ तालमेल बैठाकर, जीवन में एक नयी उम्मीद का संचार करता है, ही कारगर सिद्व होता है।
मनोचिकित्सा का सहारा लेना काफी लाभदायक सिद्ध होता है क्योंकि एक मनोचिकित्सक प्रायः स्थिति को एक भावनात्मक तरीके से देखता है, रोगी को असीमित धैर्य के साथ सुनता है, एक नयी उम्मीद का संचार करता है तथा अपने यकीन की भावना को बढावा देता है।
यह चिकित्सा उस स्थिति में उत्तमरूप से कारगर सिद्व होती है जब व्यक्ति को वह सब कुछ करने के लिए कहा जाय जिसे वह करना नहीं चाहता। तभी व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ अनुभव कर सकता है। मनोचिकित्सक की सहायता से व्यक्ति के आचरण का गहराई से अध्ययन किया जा सकता है तथा वह वह प्रतिकूल एवं हानिकारक वातावरण से भी कुछ हद तक छुटकारा पा लेता है।
लोग मनोचिकित्सक को उनसे बात करने के लिए फीस देते हैं अतः एक मनोचिकित्सक का यह कर्तव्य है कि वह उनके जीवन को कठिनाइयों से उबार कर सरल एवं सजीव बनाए। यह कहा जा सकता है कि मनोचिकित्सा लोगों की मुसीबतों एवं दुखों को दूर करने के लिए एक अत्यंत सफल साधन है। जीवन दुखों से नहीं बल्कि प्रसन्नता से परिपूर्ण एक संगम है जिसमें सुख-दुख, उतार-चढ़ाव लगे ही रहते हैं। हमें यह जान लेना चाहिए कि पहले हम अपनी समस्याओं को अपने विचारों में बांधें तथा इसी विचारपूर्ण स्थिति में समस्या का समाधान करें। एक मनोचिकित्सक इसी विचारपूर्ण हल प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
मनोचिकित्सकों का यह मानना है कि बचपन में भोगी मुसीबतें आगे जाकर अनेक रूपों जैसे वैवाहिक मुसीबतों, आसामान्य रूप से खाना, अल्कोहल की लत एवं अन्य अनेक समस्याओं के रूप में उभरती हैं। मनोचिकित्सक उन लोगों के लिए काफी प्रभावी सिद्व होता है जो अपने आचरण एवं जानकारी संबंधी गड़बडि़यों को स्थायी रूप से समाप्त करना चाहते हैं।
लोगों के स्वयं के विचार एवं व्यवहार असामान्य रूप से तीखे एवं भर्त्सनापूर्ण होते हैं जो बिलकुल जरूरी नहीं है। इन्ही उदासीन एवं तकलीफदेह विचारों के बार-बार आने के कारण ही जीवन धीरे-धीरे पतन की तरफ चलता जाता हे। जीवन तब तक नीरस बना रहता है जब तक व्यक्ति को यह अनुभव नहीं होता कि जीवन एक हंसती-खेलती, सजीव, प्रभावकारी एवं उत्साहवर्धक प्रक्रिया है।
