सौ अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने को भारत को स्थिर कृषि-निर्यात नीति की ज़रूरत: समीक्षा

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Labourers remove dried grass from a rice field on the outskirts of Ahmedabad

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) भारत को कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपनी नीतियों को सही करना चाहिए और ऐसे अस्थायी व्यापार प्रतिबंधों से बचना चाहिए जो आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं और एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के तौर पर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।

संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कृषि निर्यात ‘‘आसान लक्ष्य है जिसमें निर्यात की अपार संभावनाएं हैं’’ और यह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फायदेमंद है, और ऐसी नीतियों की ज़रूरत है जो घरेलू मांग और निर्यात वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखें।

भारत का लक्ष्य अगले चार साल में कृषि, समुद्री उत्पादों और खाद्य और पेय पदार्थों के सम्मिलित निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में हुए कृषि निर्यात के 51.1 अरब डॉलर से ज़्यादा है।

विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार, मूल्य के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश वैश्विक कृषि निर्यात में सिर्फ़ 2.2 प्रतिशत का योगदान देता है, जो वर्ष 2000 में 1.1 प्रतिशत था। समीक्षा में इसे ‘एक महत्वपूर्ण अप्रयुक्त क्षमता’ बताया गया है।

वित्त वर्ष 2019-20 और 2024-25 के बीच कृषि निर्यात 8.2 प्रतिशत की सालाना की दर से बढ़ा, जो कुल माल निर्यात वृद्धि 6.9 प्रतिशत से ज़्यादा है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2022-23 और 2024-25 के बीच कृषि निर्यात स्थिर रहा, जबकि वैश्विक कृषि व्यापार वर्ष 2022 में 2,300 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 2,400 अरब डॉलर हो गया।

समीक्षा ने चेतावनी दी गई है कि ‘‘बार-बार नीतिगत बदलाव निर्यात आपूर्ति श्रृंखला को काफी हद तक बाधित कर सकते हैं, बाजार में अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं और विदेशी खरीदारों को दूसरे स्रोतों की ओर जाने के लिए मजबूर कर सकते हैं।’’ इसमें कहा गया है कि एक बार खोए हुए निर्यात बाजारों को आसानी से वापस नहीं पाया जा सकता है।

भारत ने अक्सर घरेलू महंगाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी निर्यात प्रतिबंध या न्यूनतम निर्यात कीमतों का इस्तेमाल किया है, ऐसे उपाय जो अस्थायी रूप से कीमतों को स्थिर कर सकते हैं लेकिन लंबे समय में प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

आर्थिक समीक्षा ने उचित कीमतों पर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक नीतिगत उपायों की सिफारिश की, जिसमें सब्सिडी वाला खाद्य वितरण, बफर स्टॉक प्रबंधन, बाजार हस्तक्षेप और जमाखोरी विरोधी उपायों को लागू करना शामिल है।

समीक्षा में कहा गया है कि ‘‘किसानों को बेहतर आय के लिए वैश्विक बाजारों का लाभ उठाने में सक्षम बनाते हुए घरेलू उपलब्धता और कीमतों को स्थिर करना संभव है।’’

वित्त वर्ष 2024-25 तक पांच साल की अवधि में भारत के कृषि निर्यात का हिस्सा वस्तु निर्यात का 11-14 प्रतिशत रहा।

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